फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   2000 crores loss in six scam in yeida

बड़ा खुलासा: छह घोटालों से यीडा को हुआ 2000 करोड़ का घाटा, सीबीआई जांच संभव

Mon, 25 Jun 2018 04:12 PM IST
अरविंद सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
अरविंद सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Mon, 25 Jun 2018 04:12 PM IST
विज्ञापन
2000 crores loss in six scam in yeida
पूर्व सीईओ गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
मथुरा में जमीन खरीदकर 126 करोड़ रुपये के घोटाले में फंसे यीडा के पूर्व सीईओ व रिटायर आईएएस अधिकारी पीसी गुप्ता का नाम कई और घोटालों में भी सामने आ रहा है। इन सभी की जांच चल रही है। एफआईआर दर्ज कराकर इनका भी खुलासा किया जा सकता है। 
विज्ञापन


इन सभी घोटालों से यमुना प्राधिकरण को करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आकलन है। चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने इन सभी मामलों की जांच पूरी होते ही प्रदेश सरकार को सीबीआई से जांच कराने के लिए पत्र लिखने की बात कही है।   
विज्ञापन


मथुरा में 126 करोड़ का घोटाला 
2014 में मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई। इसके एवज में 85.49 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस रकम पर यीडा अब तक 40.93 करोड़ रुपये भी जमा कर चुका है। इस जमीन पर प्राधिकरण की कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं थी। अब भी यह जमीन खाली पड़ी है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


जहांगीरपुर में 80 करोड़ का जमीन घोटाला 
जहांगीरपुर में 765 केवी सबस्टेशन की जमीन खरीदने में 80 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। बिजलीघर के नाम पर जरूरत से ज्यादा जमीन खरीदी गई। यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार पहले ही कह चुके हैं इनमें भी अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जिनके नाम मथुरा घोटाले में हैं। इसकी भी जांच लगभग पूरी हो गई है। दोषियों पर जल्द एफआईआर दर्ज हो सकती है।  

जेवर में 450 करोड़ का घोटाला 
2009 से 2013 के बीच यमुना प्राधिकरण के 15 गांवों में करीब 700 एकड़ जमीन खरीदी गई। इनमें बैराना, अलीपुर, भट्टा, अमरपुर पलाका, जहांगीरपुर, दयानतपुर, करौली बांगर, मेहंदीपुर बांगर, अनवरगढ़ बांगर, सुल्तानपुर, तकीपुर बांगर, मोहम्मदाबाद खेड़ा, भाईपुर ब्रह्मनान, नेवला गोपाल गढ़ और लतीफपुर बांगर शामिल हैं। इन गांवों की जमीन पर कोई प्लान नहीं बना था, फिर भी प्राधिकरण ने खरीद ली। किसानों को इसका मुआवजा बांट दिया गया। इन गांवों में 450 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने का आकलन है।   

हाथरस में 150 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला 
हाथरस के मुढ़ावली गांव के किसानों से करीब 42 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी। जमीन देने वाले किसानों को विकसित एरिया में सात फीसदी भूखंड देना था। इसी की आड़ लेकर 2013 में हाथरस में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई। यह जमीन भी मास्टर प्लान से बाहर की है। यहां भी जमीन खरीदने में अधिकतर वही नाम सामने आ रहे हैं, जो कि मथुरा में जमीन घोटाले में हैं।  

जीरो पीरियड का लाभ 
यमुना प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता का नाम न सिर्फ जमीन खरीदने में हुई गड़बड़ी में शामिल है, बल्कि बिल्डरों को जीरो पीरियड का लाभ देकर भी प्राधिकरण को नुकसान पहुंचाने में भी सामने आ रहा है। शासन ने यमुना प्राधिकरण के साथ ही नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की भी जांच कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से करने को कहा है। इससे यमुना प्राधिकरण को 500 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन है।  

13 संस्थागत भूखंडों का सस्ती दर पर आवंटन 
यमुना प्राधिकरण के सेक्टर 17ए व 24 में करीब 7 साल पहले 13 संस्थागत भूखंडों का करीब 1055 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन का आवंटन हुआ, जबकि जमीन अधिग्रहण से लेकर विकास कार्य कराने और सात प्रतिशत आवासीय जमीन किसानों को देने तक का खर्च जोड़ा जाए तो इसकी कीमत करीब 2200 रुपये प्रति वर्ग मीटर बैठती है।

आवंटन इससे भी अधिक कीमत पर होनी चाहिए थी, लेकिन आधी दर पर आवंटित कर दी गई। इन सातों आवंटनों से प्राधिकरण को करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है। इसकी जांच चल रही है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed