पल भर में खामोश हो गईं 17 जिंदगियां, बुझी राख में अपनों को तलाश रही थी आंखें
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पटाखों के गोदाम में आग लगते ही वहां भगदड़ मच गई...। गोदाम व आस पास की फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे...। गोदाम में करीब 80 मजदूर काम करते थे, जिसमें महिलाओं की बड़ी संख्या थी। दमकल की गाड़ियों ने आग बुझाकर जैसे ही हताहतों को बाहर निकालना शुरू किया, अपनों को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई...। लेकिन कुछ ही देर पहले तक आबाद जिंदगियां अब खामोश हो चुकी थी। जो अपने परिजनों को खो चुके थे, वे विलाप करने लगे। उनकी आंखों के सामने अपने कंकाल हो चुके थे।
आग लगने की जानकारी मिलने के बाद गोदाम में काम करने वाले लोगों के रिश्तेदार व परिचित वहां पहुंचने लगे। मृत लोगों में से कइयों की पहचान कर ली गई। इसके बाद वहां चीख पुकार मच गई। कुछ लोग अपनों के जिंदा होने की आस में अस्पताल पहुंचे। वहां भी अफरा-तफरी जैसा माहौल था।
अपनों की खोज खबर लेने के लिए लोग इधर उधर भागते नजर आए। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि गोदाम में उसके बेटे और बहू काम करते थे। बेटा काम खत्म करने के बाद घर आ गया था जबकि बहू काम कर रही थी। उसे अस्पताल में इस बात की जानकारी नहीं मिल रही थी कि उसकी बहू जीवित है या फिर उसकी मौत हो गई।
अस्पताल पहुंचे ज्यादातर लोग अपनों की तलाश कर रहे थे। लेकिन कोई भी यह बताने की स्थिति में नहीं था कि किसकी मौत हुई है और किसकी नहीं। डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर लोगों के शरीर इतने झुलस गए थे कि उनकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है। घटना के बाद इलाके में मातम छा गया है। मृतकों के परिवार वालों ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
आग लगने के बाद इलाके में बिजली काट दी गई
आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे दमकल अधिकारियों ने सबसे पहले इलाके की बिजली को बंद करवा दिया, जिसकी वजह से आस पास की फैक्ट्रियों में काम बंद हो गया। उन फैक्ट्रियों में काम करने वाले सारे मजदूर बाहर आ गए। धीरे धीरे उस इलाके में अंधेरा छा गया, लेकिन सैकड़ों की संख्या में मजदूर घटनास्थल पर डटे रहे।
भीतर का मंजर डरावना और भयानक था
आग बुझाने के बाद गोदाम में घुसी पुलिस व दमकल कर्मियों ने बताया कि अंदर का मंजर काफी डरावना और भयानक था। चारों तरफ सिर्फ पटाखों के पैकेट और बुरी तरह से झुलसी हुई लाशें पड़ी थी, जिसमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी।
आशंका है कि गोदाम में भारी मात्रा में बारुद रखा था, जिसकी वजह से आग लगने के बाद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल पाया और उनकी दर्दनाक मौत हो गई। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि गोदाम में प्लास्टिक की फैक्ट्री चलाने का लाइसेंस था। जबकि लंबे समय से पटाखा बनाने का काम चल रहा था।