{"_id":"5daa0de88ebc3e93db11bc27","slug":"16-in-haryana-36-percent-in-punjab-more-parali-burns","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली-एनसीआर को पराली के धुएं के कहर से मौसमी दशाओं ने बचाया, सीपीसीबी ने जारी की 25 दिन की रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली-एनसीआर को पराली के धुएं के कहर से मौसमी दशाओं ने बचाया, सीपीसीबी ने जारी की 25 दिन की रिपोर्ट
Sat, 19 Oct 2019 12:39 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 19 Oct 2019 12:39 AM IST
विज्ञापन
पराली
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनसीआर में पराली के धुएं से होने वाले प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार और एजेंसियों के बीच सियासत गरम है, लेकिन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में बीते दो साल में इजाफा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
सीपीसीबी के मुताबिक पिछले करीब 25 दिन में ही पंजाब में 36 फीसदी ज्यादा पराली जलाई गई, जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 16 फीसदी के करीब रहा। हालांकि, इसी बीच ज्यादातर समय में दिल्ली पहुंचने वाली पुरवा हवा की रफ्तार धीमी रही। इससे पराली के धुएं से दिल्ली पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। दिल्ली के प्रदूषण में अभी इसका दस फीसदी भी हिस्सा नहीं है।
विज्ञापन
सीपीसीबी ने 23 सितंबर से 17 अक्तूबर के बीच सेटेलाइट की तस्वीरों के जरिए पंजाब व हरियाणा में पराली जाने के मामलों की तुलना की है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल इस बीच पंजाब में 1198 मामले सामने आए थे, जबकि इस साल 1631 जगह पर पराली जलाई गई। सबसे ज्यादा मामले बीते तीन दिन में दिखे हैं। 17 अक्तूबर को 266 जगह पराली जलाई गई। दूसरी तरफ हरियाणा में इस बीच पराली जलाने के मामले 1346 से बढ़कर 1571 हो गए। 16 अक्तूबर को सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि सात अक्तूबर को 290 मामले सामने आए थे।
विज्ञापन
सीपीसीबी का मानना है कि पराली जलाने के मामलों में बढ़ोत्तरी होने के बावजूद मौसमी दशाओं की वजह से अभी दिल्ली पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा है। इस बीच हवा की दिशा और चाल दिल्ली के लिए बेहतर रही। ज्यादातर समय में पश्चिमी यूपी व हिमालय की तरफ से चलने वाली हवाएं दिल्ली पहुंचीं, जबकि बीच-बीच में हरियाणा की तरफ से आने वाली हवाओं की चाल इतनी धीमी थी कि वह धुएं को अपने साथ दिल्ली तक नहीं पहुंचा सकीं। इससे अभी तक पराली के धुएं का दिल्ली के प्रदूषण में हिस्सा दस फीसदी के आंकड़े को नहीं छू सका है। शुक्रवार को भी यह आंकड़ा सात फीसदी के करीब था। हालांकि, शनिवार को यह 17 फीसदी तक पहुंच सकता है।
दोनों राज्यों में एक साल में 3000 से अधिक जगह जली पराली
पराली जलाते हुए
- फोटो : फाइल फोटो
सीपीसीबी के मुताबिक वर्ष 2019 में पंजाब और हरियाणा में 3202 जगह पराली जलाई गई, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 2544 था। वर्ष 2019 में अब तक पंजाब में 1571 और हरियाणा में 1631 मामले पराली जलाने के सामने आए हैं। दिल्ली की हवा में पराली के धुएं से होने वाले प्रदूषण का अभी 7 फीसदी हिस्सा है।
उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करने पर बंद होंगे पावर प्लांट: ईपीसीए
ईपीसीए ने कहा है कि 2020 तक उत्सर्जन मानकों की अनुपलना नहीं होने पर हरियाणा के दो तापीय विद्युत संयत्र बंद कर दिए जाएंगे। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने 2015 में तापीय विद्युत संयत्रों के लिए पीएम 10, सल्फर डाईऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन से संबंधित नए मानक तय किए थे, जो दिसंबर 2019 से लागू होंगे। अनुमान है कि इन मानकों का पालन करने पर हवा में उत्सजर्कों की मात्रा में 2026 तक 35 से 85 फीसदी तक की गिरावट आएगी।
पराली जलाने के मामले में शीर्ष जिले
पंजाब : अमृतसर (452), तरन तारन (346) व पटियाला (180)
हरियाणा : करनाल (404), कैथल (323) व कुरुक्षेत्र (284)।
उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करने पर बंद होंगे पावर प्लांट: ईपीसीए
ईपीसीए ने कहा है कि 2020 तक उत्सर्जन मानकों की अनुपलना नहीं होने पर हरियाणा के दो तापीय विद्युत संयत्र बंद कर दिए जाएंगे। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने 2015 में तापीय विद्युत संयत्रों के लिए पीएम 10, सल्फर डाईऑक्साइड व नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन से संबंधित नए मानक तय किए थे, जो दिसंबर 2019 से लागू होंगे। अनुमान है कि इन मानकों का पालन करने पर हवा में उत्सजर्कों की मात्रा में 2026 तक 35 से 85 फीसदी तक की गिरावट आएगी।
पराली जलाने के मामले में शीर्ष जिले
पंजाब : अमृतसर (452), तरन तारन (346) व पटियाला (180)
हरियाणा : करनाल (404), कैथल (323) व कुरुक्षेत्र (284)।