निर्भयाः नाबालिग दोषी की मां को बेटे का इंतजार, गांव वाले परेशान
अगले महीने 16 दिसंबर गैंगरेप का नाबालिग दोषी अपनी सजा खत्म करके रिहा होने वाला है। ऐसे में जहां इस गैंगरेप की शिकार हुई निर्भया के माता-पिता उसके बाहर आने से डरे हुए हैं वहीं नाबालिग दोषी की मां को अपने बेटे का इंतजार है।
उसकी तीन साल की सजा दिसंबर में ही पूरी हो रही है। बता दें कि बदायूं के उसके गांव में उसकी मां तो उसका इंतजार कर रही है लेकिन उसके गांव वालों की इसको लेकर अलग-अलग राय है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार हालांकि उसकी मां चाहती है कि उसके बेटे को सजा मिले लेकिन वो उससे मिलना भी चाहती है। वहीं गांव का प्रधान उसकी रिहाई से काफी नर्वस है और उसने नाबालिग दोषी पर नजर रखने के लिए एक टीम का गठन भी कर लिया है।
(फोटो साभारः इंडियन एक्सप्रेस)
नाबालिग का व्यवहार अच्छा नहीं हुआ तो कर देंगे परिवार का बहिष्कार
बता दें कि मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए नाबालिग दोषी की रिहाई के बारे में जानकारी मांगी है। आयोग ने ऐसा निर्भया के माता-पिता की चिंता को देखते उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के चलते किया।
बुधवार को नाबालिग दोषी के ग्राम प्रधान ने कहा कि बात बहुत साफ है, अगर वो अच्छा व्यवहार करता है तो हम उसे काम धंधा दिलाने में सहायता देंगे। लेकिन अगर वो नहीं सुधरा और उसका व्यवहार गलत रहा तो हम न केवल उसका बल्कि उसके पूरे परिवार का बहिष्कार कर देंगे।
एक अन्य गांव वाले ने नाबालिग दोषी की रिहाई की बात पर चिंता जताते हुए कहा कि उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी।
गांव अब भी करता है दोषी के परिवार की मदद
नाबालिग दोषी के गांव के अन्य व्यक्ति ने बोला कि उसे तीन साल के लिए बाल सुधारगृह में भेज दिया गया था लेकिन वो और कड़ी सजा का हकदार था। वो घटना बेहद शर्मनाक थी और उसके इस कृत्य से हमारे गांव का नाम बदनाम हुआ। अब देशभर के लोग हमारे गांव को 16 दिसंबर गैंगरेप के एक दोषी के गांव के रूप में जानते हैं।
हालांकि ये बता दें कि इस निर्भया गैंगरेप जैसे मामले के बाद भी गांववालों ने कभी नाबालिग दोषी के परिवार से मुंह नहीं मोड़ा और हमेशा उनकी सहायता की। गांव के प्रधान ने बताया कि उसके परिवार और घर की स्थिति देखने के बाद हाल ही में गांववालों ने मिलकर उसके घर की छत और दीवार का निर्माण कराया है।
गौरतलब है कि नाबालिग दोषी का घर आज भी उसी हालत में है जैसा वो सात साल पहले छोड़कर गया था। तिरपाल से ढकी खिड़की और छत और टूटी दीवारें ही उसके 6 लोगों के परिवार के लिए कवर का काम करती हैं।
उसके परिवार में एक मानसिक रूप से बीमार पिता है, मां है जो डिप्रेशन से ग्रस्त है और चार भाई बहन हैं। उसकी एक 17 साल की बहन है जो हर महीने 200 रुपए कमाती है और अकेली शख्स है जो घर चला रही है।
मां चाहती है बेटा आए और जिम्मेदारी संभाले
नाबालिग दोषी की मां से जब भी उसके बेटे के बारे में पूछा जाता है तो वो टूट जाती है। वो कहती है कि वो तो कल्पना भी नहीं कर पाती कि अब उसका बेटा कैसा दिखता होगा। वो पांचों बच्चों में सबसे बड़ा है। उसकी मां आगे कहती है कि ऐसा लगता है मानो उसे घर छोड़े हुए बरसों बीत गए हों।
उन्हें अपने बेटे से उम्मीद है कि वो वापस आए और घर की जिम्मेदारी संभाले। वो बताती हैं कि हमारे लिए एक जून का खाना भी बहुत मुश्किल है और मेरी बेटी ही अकेली कमाने वाली है। वो अपनी बेटियों की चिंता जताते हुए कहती हैं कि मैं तो यही सोचती हूं कि मेरी बेटियां बड़ी हो रही हैं और मैं उनकी शादी कैसे करूंगी।
वो कहती हैं कि पहले तो वो कुछ पैसे भेज देता था लेकिन पिछले 5 साल से हमें उसकी कोई खबर नहीं मिली। उसके बारे में तब ही पता चला जब उसका नाम गैंगरेप केस में आया। वो इस खबर पर विश्वास ही नहीं कर पाई थीं। हालांकि उसकी बहनें उसके बारे में कुछ भी कहने से मना करती हैं।