केंद्र सरकार ने कहा उसके पास नहीं है वाहनों का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार
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दस साल से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण निरस्त करने और 15 साल पुराने डीजल वाहनों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न जारी कर स्क्रैप करने संबंधी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के हालिया आदेश पर केंद्र सरकार ने कानूनी अड़चनों को लेकर सवाल उठाया है।
भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय की ओर से एनजीटी में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है जिससे 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों, जो कि भारत मानक एक और भारत मानक दो के दायरे में आते हैं उन्हें स्क्रैप किया जा सके।
वहीं मौजूदा मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के मुताबिक 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों का पंजीकरण निरस्त करने की शक्ति न ही राज्य और केंद्र सरकार केंद्र के पास है।
भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से पेश होने वाली एडिशनल सॉलीसीटर जनरल पिंकी आनंद की ओर से एनजीटी में यह हलफनामा दाखिल किया गया। हलफनामे में कहा गया है कि यदि बलपूर्वक इन वाहनों को स्क्रैप किया जाता है तो ऐसे में कई कानूनी विवाद खड़े हो जाएंगे। क्योंकि वाहन मालिक जो मौजूदा नियमों के तहत कानूनी तौर पर सही है।
यदि ट्रिब्यूनल के आदेश को ऊपर रखते हुए डीजल वाहनों को स्क्रैप करने के लिए बलपूर्वक प्रयास किया भी गया तो कई अदालतों में याचिकाएं दाखिल होंगी। इससे न सिर्फ अदालतों का समय बर्बाद होगा बल्कि कई नई मुसीबतें भी पैदा होंगी।
मोटर वाहन अधिनियम 1988 जो कि 2015 में संशोधित किया गया था। उसमें वाहनों का पंजीकरण निरस्त करने संबंधी ऐसा कोई प्रावधान और नियम मौजूद नहीं है। इस अधिनियम के तहत ही यह प्रावधान है कि जिन वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसी) होगा वे ही सड़कों पर चल सकेंगे।
वहीं मंत्रालय ने अपने हलफनामे में डी-रजिस्टर यानी विपंजीकृत शब्द पर भी सवाल उठाया है। मंत्रालय ने कहा है कि वाहनों के मालिकों को यह मौका मिलना चाहिए कि वह प्रतिनिधि के तौर पर यह कह सकें कि उनका पंजीकरण निरस्त होने लायक है।