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CAA: पाकिस्तान से आए भरत का 11 साल का सपना सच, बोले- भारतीय होना शानदार एहसास
Thu, 16 May 2024 07:50 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 16 May 2024 07:50 AM IST
सार
भरत कुमार ने कहा, मैं 13 साल का था जब मेरा परिवार धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आया था। वहां दहशत में जीना मुश्किल हो गया था। दिल्ली में, कुमार का परिवार मजनू का टीला इलाके में रहता था और छोटे-मोटे व्यवसाय में लगा हुआ था।
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सीएए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर भारत आए भरत कुमार का भारतीय नागरिकता पाने के लिए चला लंबा संघर्ष 11 साल के इंतजार के बाद समाप्त हो गया। वह बुधवार को सीएए के जरिये नागरिकता पाने वाले उन 14 लोगों में से एक हैं। भरत कुमार ने नागरिकता प्रमाणपत्र मिलने के बाद कहा, भारतीय होना एक शानदार एहसास है। इसने मुझे एक नया जीवन दिया है।
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भरत कुमार ने कहा, मैं 13 साल का था जब मेरा परिवार धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आया था। वहां दहशत में जीना मुश्किल हो गया था। दिल्ली में, कुमार का परिवार मजनू का टीला इलाके में रहता था और छोटे-मोटे व्यवसाय में लगा हुआ था। उन्होंने कहा कि बुधवार को उनके इलाके में कुल पांच लोगों को भारतीय नागरिकता मिली, जबकि सौ से अधिक लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था। बाकी आवेदकों को भी उचित समय पर नागरिकता मिलेगी। भरत ने कहा कि भारतीय नागरिकता मिलना सपने के सच होने जैसा है। मजनू का टीला में ही रहने वाले शीतल दास ने कहा कि उनका 19 लोगों का परिवार भी 2013 में पाकिस्तान के सिंध से आया था। उनमें से तीन को नागरिकता मिल गई। मैं बहुत खुश हूं। सरकार ने हमारी इच्छा पूरी कर दी है। अब मैं भारत में सम्मानजनक जीवन जी सकता हूं।
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हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो गया: दयाल दास
मजनू का टीला निवासी 47 वर्षीय दयाल दास ने कहा, मोदी सरकार के इस कदम से हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो गया। हम पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद से 2013 में भारत आए थे। हम वहां असुरक्षित और डरे हुए थे इसलिए अपने वतन लौटकर आए। आज हमारा संघर्ष रंग लाया है और हम खुद को भारतीय कह सकते हैं। सीएए लागू करने और हमें नागरिकता देने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूं। भरत और यशोदा दयाल दास के बच्चे हैं। उन्हें भी नागरिकता प्रमाणपत्र मिला है। दयाल ने कहा, मेरे बच्चों को शिक्षा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। हमारे परिवार के अन्य सदस्यों को भी नागरिकता मिलने के बाद, हम अयोध्या में श्रीराम मंदिर जाएंगे। यह सर्वशक्तिमान के आशीर्वाद के कारण है कि हमें हमारे देश की नागरिकता मिल गई है। अब पहचानपत्र के लिए आवेदन करेंगे।
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अब भारतीय के रूप में जी सकूंगी सम्मानजनक जीवन : यशोदा
मजनू का टीला में रहने वाली यशोदा ने कहा, अब वह एक भारतीय के रूप में सम्मानजनक जीवन जी सकेंगी। धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर यशोदा भी सिंध प्रांत से भारत आ गईं थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि भारत की नागरिकता से अब परिवार और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा। मैं बहुत खुश हूं।