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105 साल के बुजुर्ग मरीज का किया कूल्हा प्रत्यारोपण
Mon, 28 Jan 2019 11:51 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Mon, 28 Jan 2019 11:51 PM IST
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दिल्ली के प्राइम अस्पताल में 105 साल के एक बुजुर्ग मरीज का डॉक्टरों ने कूल्हा प्रत्यारोपण किया है। डॉक्टरों का दावा है कि ये मरीज दुनिया में सबसे अधिक उम्र का मरीज है, जिनके कूल्हे का प्रत्यारोपण हुआ है। इसलिए हाल ही में इस केस को लेकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए आवेदन भी किया है।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. कौशल कांत मिश्रा ने बताया कि 1971 में सैन्य सुरक्षा से सेवानिवृत्त हुए पंजाब के मूल निवासी गुरुवचन सिंह संधू अपने घर में शौचालय में गिरने के बाद चलने-फिरने में असमर्थ हो गये और उन्हें फिर 19 जनवरी को अस्पताल लाया गया। चूंकि मरीज का चलना फिरना भी मुश्किल था। इसलिए तमाम मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने तत्काल उनके प्रत्यारोपण का फैसला लिया।
प्रत्यारोपण के बाद दो दिन तक विशेष निगरानी में डॉक्टरों को सब कुछ ठीक मिलने के बाद 22 जनवरी को मरीज को घर भेज दिया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि मरीज के छुट्टी देने के बाद उन्होंने दुनिया भर के जर्नल और ऑर्थो मेडिकल से जुड़े रिकॉर्डों की जानकारी एकत्रित की, लेकिन कहीं भी उन्हें इतनी उम्र में कूल्हा प्रत्यारोपण का मामला नहीं मिला है।
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इससे पहले 102 साल के एक मरीज का यूके में कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया था। इसीलिए उन्होंने दुनिया में ये 105 साल के मरीज में इकलौती सर्जरी होने का दावा किया है। अब गुरबचन सिंह संधू छड़ी की मदद से घूमते-फिरते हैं और उनकी शारीरिक चुस्ती-दुरुस्ती से सर्जरी में मदद मिली। उन्होंने ये भी बताया कि मार्च 2019 में संधू 106 वर्ष के पूरे हो जाएंगे।
डॉ. मिश्रा का कहना है कि सीमेंट और बगैर सीमेंट दो तरह का प्रत्यारोपण किया जाता है। चूंकि सीमेंट के इम्प्लांट में कई तरह के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। कई बार मरीज की जान तक पर बन आती है। इसलिए उन्होंने अपने मरीज में बगैर सीमेंट वाले इम्प्लांट को प्रत्यारोपित किया। चेहरे पर मुस्कान के साथ डॉ. मिश्रा कहते हैं कि जब उनका जन्म हुआ था उस साल ही मरीज संधू अपनी सेवाओं से रिटायर्ड हुए थे। इससे जाहिर होता है कि ये केस उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
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अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. कौशल कांत मिश्रा ने बताया कि 1971 में सैन्य सुरक्षा से सेवानिवृत्त हुए पंजाब के मूल निवासी गुरुवचन सिंह संधू अपने घर में शौचालय में गिरने के बाद चलने-फिरने में असमर्थ हो गये और उन्हें फिर 19 जनवरी को अस्पताल लाया गया। चूंकि मरीज का चलना फिरना भी मुश्किल था। इसलिए तमाम मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने तत्काल उनके प्रत्यारोपण का फैसला लिया।
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प्रत्यारोपण के बाद दो दिन तक विशेष निगरानी में डॉक्टरों को सब कुछ ठीक मिलने के बाद 22 जनवरी को मरीज को घर भेज दिया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि मरीज के छुट्टी देने के बाद उन्होंने दुनिया भर के जर्नल और ऑर्थो मेडिकल से जुड़े रिकॉर्डों की जानकारी एकत्रित की, लेकिन कहीं भी उन्हें इतनी उम्र में कूल्हा प्रत्यारोपण का मामला नहीं मिला है।
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इससे पहले 102 साल के एक मरीज का यूके में कूल्हा प्रत्यारोपण किया गया था। इसीलिए उन्होंने दुनिया में ये 105 साल के मरीज में इकलौती सर्जरी होने का दावा किया है। अब गुरबचन सिंह संधू छड़ी की मदद से घूमते-फिरते हैं और उनकी शारीरिक चुस्ती-दुरुस्ती से सर्जरी में मदद मिली। उन्होंने ये भी बताया कि मार्च 2019 में संधू 106 वर्ष के पूरे हो जाएंगे।
डॉ. मिश्रा का कहना है कि सीमेंट और बगैर सीमेंट दो तरह का प्रत्यारोपण किया जाता है। चूंकि सीमेंट के इम्प्लांट में कई तरह के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। कई बार मरीज की जान तक पर बन आती है। इसलिए उन्होंने अपने मरीज में बगैर सीमेंट वाले इम्प्लांट को प्रत्यारोपित किया। चेहरे पर मुस्कान के साथ डॉ. मिश्रा कहते हैं कि जब उनका जन्म हुआ था उस साल ही मरीज संधू अपनी सेवाओं से रिटायर्ड हुए थे। इससे जाहिर होता है कि ये केस उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।