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Delhi NCR News: 24 घंटे में 10 हजार ट्रांजेक्शन से ठगे 5.24 करोड़ रुपये, नौ गिरफ्तार
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-दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आरोपियों को दबोचा, 12 फोन, चेकबुक, डेबिट कार्ड व अन्य सामान बरामद
साइबर ठगी का पैसा सफेद करने को भेजते थे विदेश, आरोपियों के मोबाइल से लेनदेन के चैट भी मिले
विदेशियों के सीधे संपर्क में था गैंग सरगना सुरेश कुमार कुमावत, पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की कर रही तलाश, छानबीन जारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह सरगना के जरिये विदेश में बैठे साइबर ठगों के सीधे संपर्क में था। आरोपी ठगों को बैंक खाते उपलब्ध करवाने के अलावा हवाला के जरिये रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेज रहे थे।
आरोपियों की पहचान सुल्तान सलीम शेख (पालघर, महाराष्ट्र), सैयद अहमद चौधरी (बेंगलुरु, कर्नाटक), सतीश कुमार (भिवंडी, ठाणे, महाराष्ट्र), तुषार मालिया (शाहदरा, दिल्ली), शिवम (झाड़ौदा कलां, दिल्ली), सुनील (बेगमपुर गांव, दिल्ली), प्रभु दयाल (डिडवाना, राजस्थान), तरुण शर्मा (सीकर, राजस्थान) और सुरेश कुमार कुमावत (नागौर, राजस्थान) के रूप में हुई है। भारत में गिरोह का सरगना सुरेश कुमार कुमावत है। छानबीन में पता चला कि इनके एक बैंक खाते में महज 24 घंटे के भीतर 10,423 ट्रांजैक्शन में 5.24 करोड़ रुपये की ठगी की रकम आई। इस तरह के कई बैंक खातों का पता चला है। आरोपियों के पास से 12 मोबाइल फोन कई चेक बुक, डेबिट कार्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं।
होटल में दबोचे गए आरोपी
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि 26 नवंबर को टीम को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग द्वारका के एक होटल से साइबर ठगी का गैंग चला रहे हैं। इसके अलावा यहां पर साइबर धोखाधड़ी के लिए कुछ बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारी जुटाने के बाद टीम ने मौके पर छापेमारी की। होटल से चार लोगों सुल्तान सलीम शेख, सैयद अहमद चौधरी, तुषार मालिया और सतीश कुमार को गिरफ्तार किया। सभी होटल के कमरे में एक साथ थे। इन लोगों ने बताया कि यह एक संदिग्ध के आदेश पर साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध करा रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए यह लोग जल्द-जल्द अपने ठिकाने भी बदल रहे हैं।
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25 प्रतिशत कमीशन देने का किया वादा
जांच के दौरान सुल्तान ने बताया कि उसने एक महीने पहले एक निजी बैंक में करंट अकाउंट दूसरे संदिग्ध के कहने पर खोला था। संदिग्ध ने सुल्तान से ठगी की रकम पर 25 फीसदी कमीशन देने का वादा किया। बाद में उसे एक नया फोन भी दिया गया। सुल्तान ने बताया कि बैंक खाते में आई रकम की जानकारी उसके बेटे ने ईमेल के जरिये आरोपी से शेयर की। बैंक खाते की पड़ताल करने पर पता चला कि अकाउंट में 25 नवंबर और 26 नवंबर के बीच कुल 10,423 ट्रांजैक्शन किए गए, जिसमें 5.24 करोड़ से अधिक की रकम जमा की गई। जांच में पता चला कि बैंक खाते का इस्तेमाल सिर्फ ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने गैंग के बाकी सदस्यों की पहचान करना शुरू किया।
ऐसे करते थे ठगी...
छानबीन में पुलिस को पता चला कि आरोपी एक संगठित साइबर क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा हैं। यह लोग बैंक खाताधारक अऔर मिडिल मैन और एंड-यूजर्स के नेटवर्क के जरिये काम करते हैं। इनका पूरा नेटवर्क साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करना है। मिडिल मैन के जरिये लोगों को लालच देकर खाते ले लिए जाते थे। बाद में इनको साइबर ठगों के हवाले कर दिया जाता था। बदले में उनको या तो एक मुश्त रकम मिलती थी या ठगी की रकम पर मोटा कमीशन मिलता था। सुल्तान ने साइबर ठगी से मिले पैसों से कमीशन के बदले अपने ट्रस्ट का बैंक खाता दिया। यह खाता मिडिल मैन के जरिये सिंडिकेट के सरगना सुरेश कुमार तक पहुंचाया गया।
सरगना संभालता था विदेश तक नेटवर्क
सुरेश मुख्य साइबर ठगी के सरगना के बीच की एक अहम कड़ी के तौर पर काम करता था। ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर हवाला ऑपरेटर के हवाले कर दिया जाता था। हवाला वाले क्रिप्टो करेंसी खरीदकर उसके विदेश में ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस इनसे पूछताछ कर हवाला ऑपरेटर और विदेश में बैठे अन्य मास्टरमाइंड समेत बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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साइबर ठगी का पैसा सफेद करने को भेजते थे विदेश, आरोपियों के मोबाइल से लेनदेन के चैट भी मिले
विदेशियों के सीधे संपर्क में था गैंग सरगना सुरेश कुमार कुमावत, पुलिस गिरोह के बाकी सदस्यों की कर रही तलाश, छानबीन जारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह सरगना के जरिये विदेश में बैठे साइबर ठगों के सीधे संपर्क में था। आरोपी ठगों को बैंक खाते उपलब्ध करवाने के अलावा हवाला के जरिये रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेज रहे थे।
आरोपियों की पहचान सुल्तान सलीम शेख (पालघर, महाराष्ट्र), सैयद अहमद चौधरी (बेंगलुरु, कर्नाटक), सतीश कुमार (भिवंडी, ठाणे, महाराष्ट्र), तुषार मालिया (शाहदरा, दिल्ली), शिवम (झाड़ौदा कलां, दिल्ली), सुनील (बेगमपुर गांव, दिल्ली), प्रभु दयाल (डिडवाना, राजस्थान), तरुण शर्मा (सीकर, राजस्थान) और सुरेश कुमार कुमावत (नागौर, राजस्थान) के रूप में हुई है। भारत में गिरोह का सरगना सुरेश कुमार कुमावत है। छानबीन में पता चला कि इनके एक बैंक खाते में महज 24 घंटे के भीतर 10,423 ट्रांजैक्शन में 5.24 करोड़ रुपये की ठगी की रकम आई। इस तरह के कई बैंक खातों का पता चला है। आरोपियों के पास से 12 मोबाइल फोन कई चेक बुक, डेबिट कार्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं।
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होटल में दबोचे गए आरोपी
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि 26 नवंबर को टीम को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग द्वारका के एक होटल से साइबर ठगी का गैंग चला रहे हैं। इसके अलावा यहां पर साइबर धोखाधड़ी के लिए कुछ बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारी जुटाने के बाद टीम ने मौके पर छापेमारी की। होटल से चार लोगों सुल्तान सलीम शेख, सैयद अहमद चौधरी, तुषार मालिया और सतीश कुमार को गिरफ्तार किया। सभी होटल के कमरे में एक साथ थे। इन लोगों ने बताया कि यह एक संदिग्ध के आदेश पर साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध करा रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए यह लोग जल्द-जल्द अपने ठिकाने भी बदल रहे हैं।
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25 प्रतिशत कमीशन देने का किया वादा
जांच के दौरान सुल्तान ने बताया कि उसने एक महीने पहले एक निजी बैंक में करंट अकाउंट दूसरे संदिग्ध के कहने पर खोला था। संदिग्ध ने सुल्तान से ठगी की रकम पर 25 फीसदी कमीशन देने का वादा किया। बाद में उसे एक नया फोन भी दिया गया। सुल्तान ने बताया कि बैंक खाते में आई रकम की जानकारी उसके बेटे ने ईमेल के जरिये आरोपी से शेयर की। बैंक खाते की पड़ताल करने पर पता चला कि अकाउंट में 25 नवंबर और 26 नवंबर के बीच कुल 10,423 ट्रांजैक्शन किए गए, जिसमें 5.24 करोड़ से अधिक की रकम जमा की गई। जांच में पता चला कि बैंक खाते का इस्तेमाल सिर्फ ठगी के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने गैंग के बाकी सदस्यों की पहचान करना शुरू किया।
ऐसे करते थे ठगी...
छानबीन में पुलिस को पता चला कि आरोपी एक संगठित साइबर क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा हैं। यह लोग बैंक खाताधारक अऔर मिडिल मैन और एंड-यूजर्स के नेटवर्क के जरिये काम करते हैं। इनका पूरा नेटवर्क साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करना है। मिडिल मैन के जरिये लोगों को लालच देकर खाते ले लिए जाते थे। बाद में इनको साइबर ठगों के हवाले कर दिया जाता था। बदले में उनको या तो एक मुश्त रकम मिलती थी या ठगी की रकम पर मोटा कमीशन मिलता था। सुल्तान ने साइबर ठगी से मिले पैसों से कमीशन के बदले अपने ट्रस्ट का बैंक खाता दिया। यह खाता मिडिल मैन के जरिये सिंडिकेट के सरगना सुरेश कुमार तक पहुंचाया गया।
सरगना संभालता था विदेश तक नेटवर्क
सुरेश मुख्य साइबर ठगी के सरगना के बीच की एक अहम कड़ी के तौर पर काम करता था। ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर हवाला ऑपरेटर के हवाले कर दिया जाता था। हवाला वाले क्रिप्टो करेंसी खरीदकर उसके विदेश में ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस इनसे पूछताछ कर हवाला ऑपरेटर और विदेश में बैठे अन्य मास्टरमाइंड समेत बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।