जिस वादे से सत्ता में आई थी योगी सरकार 100 दिन बाद उसी का ये है हाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने प्रदेश की जनता से वादा किया था कि 100 दिन में राज्य में तमाम सेवाओं को दुरुस्त कर उनकी तस्वीर बदल देंगे।
औद्योगिक परिकल्पना को लेकर बसे नोएडा के उद्यमियों और व्यापारियों को नई सरकार से काफी उम्मीद थी, लेकिन उनका कहना है कि शहर के औद्योगिक और व्यापारिक विकास के लिए जरूरी उनकी एक भी मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। वहीं किसान भी अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए भटक रहे हैं। इसके अलावा सस्ती मेडिकल सुविधा का सपना भी पूरा नहीं हो सका।
नोएडा एंट्रेप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) के पदाधिकारियों ने पिछले दिनों नोएडा आए प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना से मुलाकात की थी। पदाधिकारियों ने उन्हें नोएडा में उद्योगों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी देकर मांग पत्र दिया था
इसमें इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में छूट, आईटी/ आईटीईएस उद्योग लगाने, औद्योगिक भूखंडों का लीज रेंट की दर एक प्रतिशत करने, सेक्टर- 9 और 10 की इकाइयों को सर्विस इंडस्ट्री घोषित करने, औद्योगिक भूखंडों 2000 वर्ग मीटर से कम की योजना लाने, उद्यमियों के लिए आवासीय भूखंड की योजना, पुलिस अधीक्षक उद्योग का पद बहाल करने की मांग की गई थी।
इसके अलावा नोएडा बोर्ड बैठक में एनईए का प्रतिनिधित्व, औद्योगिक विवरणिका में अतिरिक्त औद्योगिक परियोजनाओं को शामिल करने, औद्योगिक सेक्टरों से अतिक्रमण हटाने और सफाई की नियमित व्यवस्था की मांग की गई थी। उद्यमियों और किसानों का कहना है कि लगता है वे सरकार से कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा बैठे हैं।
शहर में उद्योगों के विकास के लिए औद्योगिक विकास मंत्री से कई बार मांगें की जा चुकी हैं। सरकार के 100 दिन आज पूरे हो जाएंगे, लेकिन एक भी मांग पूरी नहीं हुई।-विपिन मल्हन, अध्यक्ष, एनईए
कहां हैं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
स्वास्थ्य सुविधाओं में भी खास सुधार नहीं आया है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को अब भी छोटी-छोटी जांच कराने के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। निरीक्षण के दौरान यूपी के स्वास्थ्य मंत्री ने कई सुविधाएं शुरू करने की बात कही थी, लेकिन वह भी शुरू नहीं हो पाई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि जल्द ही मरीजों के लिए शाम की ओपीडी शुरू होगी, लेकिन अभी तक ये सुविधा मरीजों को नहीं मिल सकी है। इसके अलावा चाइल्ड पीजीआई में सत्र 2017-2018 में भी मेडिकल की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई।
वहीं एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा तक नहीं है। जिला अस्पताल में मरीजों के लिए आईसीयू तक की सुविधा नहीं है और न ही दवाइयों की किल्लत से छुटकारा मिल पाया है।
हालांकि कुछ सुविधाएं जरूर शुरू हुईं। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर, जबकि चाइल्ड पीजीआई में सर्जिकल आईसीईयू और थैलेसिमिया मरीजों के लिए वार्ड सुविधा शुरू कर दी गई है।
किसानों के हाथ तब भी खाली थे और अब भी
किसानों का कहना है कि सरकार के नुमाइंदों ने न सिर्फ कर्ज माफी, बल्कि बिजली, खाद्य और बीज की समस्याओं को दूर करने का दावा किया था। नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की आज भी वहीं समस्याएं हैं जो चार दशक पहले थीं।
किसान अपने मांगों के लिए प्राधिकरणों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। इन्हीं अधिकारों को पाने के लिए गौतमब़द्ध नगर में घोड़ी-बछेड़ा और भट्टा-पारसौल जैसे कांड हो चुके हैं।
किसानों की जमीन को अधिग्रहीत कर बिल्डरों व नेताओं को बेच दिया जाता है, मगर जब प्राधिकरण से किसान अपनी जमीन के एवज में 10 फीसदी भूखंड मांगते हैं तो प्राधिकरण हाथ उठा देते हैं कि उनके पास जमीन ही नहीं है।
प्राधिकरण अभी उन किसानों को ही 10 फीसदी भूखंड दे रहे हैं जो फिर से कोर्ट गए हैं। बाकी किसानों को नोएडा में 5 और ग्रेनो में 6 फीसदी दे रहे हैं। किसानों के खेत की जिस तरह खतौनी से पहचान है। उसी तरह नोएडा, ग्रेनो के अलावा यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में किसानों के घर की पहचान नहीं हो सकी।
भाजपा सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी, मगर 100 दिन बाद भी इस संबंध में कोई कार्य नहीं हुआ है। अब बैंक के प्रतिनिधि किसानों के घर पहुंच रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब वे फसल पैदा करते हैं और बाजार ले जाते हैं तो व्यापारी एक होकर सस्ते दाम कर देते हैं। ऐेसे में फसलों की दर संरक्षित की जाए। वहींतीनों प्राधिकरण किसानों के बच्चों की शिक्षा के अनुसार उन्हें रोजगार देने के नियम को लागू करें।