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Air Quality: राजधानी की आबोहवा और सेहत पर 10 नए डिजिटल पहरेदार रखेंगे नजर, मौसम का मिजाज भी चलेगा पता
Mon, 18 May 2026 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 18 May 2026 06:27 AM IST
सार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में 10 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित करने जा रही है। हाईटेक स्टेशन दिल्ली के उन इलाकों में लगाए जाएंगे, जहां प्रदूषण का स्तर अकसर खतरनाक रहता है।
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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में 10 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित करने जा रही है।
- फोटो : AI Generated Image
विस्तार
राजधानी के लोगों को अपने क्षेत्र की हवा का हाल जानने के लिए मोबाइल एप पर निर्भर नहीं रहना होगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति राजधानी में 10 नए वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित करने जा रही है। हाईटेक स्टेशन दिल्ली के उन इलाकों में लगाए जाएंगे, जहां प्रदूषण का स्तर अकसर खतरनाक रहता है।
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डीपीसीसी ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। जून के पहले हफ्ते से इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नए स्टेशन में कोई साधारण मशीनें नहीं होंगी। यह हवा में मौजूद धूल के बारीक कणों (पीएम2.5 और पीएम10) के साथ-साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, अमोनिया, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन जैसी खतरनाक गैसों की भी निगरानी करेंगे।
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इतना ही नहीं, कैंसर कारक माने जाने वाले बेंजीन, टोल्यूनि और जाइलीन जैसे रसायनों पर भी ये स्टेशन नजर रखेंगे। प्रदूषण के साथ-साथ ये डिजिटल पहरेदार मौसम का मिजाज भी बताएंगे। हवा किस दिशा में बह रही है, उसकी रफ्तार क्या है, तापमान, नमी और बारिश की स्थिति क्या है, इन सबका डाटा हर 15 मिनट में अपडेट होगा। यह डाटा सीधे केंद्रीय सर्वर को भेजा जाएगा, जिससे प्रदूषण के स्रोतों का सटीक पता लगाया जा सकेगा।
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कबाड़ नहीं बनेंगे करोड़ों के ये उपकरण
प्रोजेक्ट की शर्तों के मुताबिक जो कंपनी यह स्टेशन लगाएगी, उसे ही अगले 10 वर्षों तक इनका संचालन और रखरखाव करना होगा। इससे ये सुनिश्चित होगा कि करोड़ों रुपये की ये मशीनें सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़कर कबाड़ नहीं बनेंगी।
आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए हर एक स्टेशन के पास बड़े डे एंड नाइट विजिबल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इससे दिल्ली के आम नागरिक को पता होगा कि उसे कब बाहर निकलना सुरक्षित है और कब सावधानी बरतनी है। सरकार ने इस प्रोजेक्ट में केवल उन्हीं कंपनियों को मौका देने का फैसला किया है, जिन्हें कम से कम 5 ऐसे स्टेशन चलाने का अनुभव हो।