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'यादव सिंह मामला रफादफा करने को मंगाए थे 10 करोड़’

Sat, 18 Jul 2015 08:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 18 Jul 2015 08:25 PM IST
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"10 million's arrangements for hush the Yadav Singh matter'

प्राधिकरण के निलंबित मुख्य अभियंता यादव सिंह और उनके नजदीकियों के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कार की डिग्गी से मिला 10 करोड़ रुपया मामले को रफादफा करने के लिए मंगवाया गया था।

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यादव सिंह को उम्मीद थी कि भारी-भरकम रकम देखकर आयकर अधिकारियों का ईमान डगमगा जाएगा, लेकिन गेम उल्टा ही पड़ गया। मौलिक भारत संस्था ने शनिवार को पत्रकार वार्ता के दौरान इस बात का खुलासा किया।
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दरअसल, सेक्टर-15ए में जिस एसयूवी कार के अंदर 10 करोड़ रुपये रखे मिले थे, वो रियल एस्टेट कारोबारी राजेंद्र मनोचा के घर के पास खड़ी थी।

एसयूवी की डिग्गी से बरामद हुए रुपए

"10 million's arrangements for hush the Yadav Singh matter'

यह रकम मामले को रफादफा करने के लिए मंगाई गई थी, लेकिन दाल नहीं गल पाई। यादव सिंह के नजदीकी माने जाने वाले रियल एस्टेट करोबारी मनोचा के सेक्टर-15ए स्थित आवास पर रात आठ बजे तक सर्चिंग अभियान चला था।

बताया जा रहा है कि जब जांच टीम अपनी कार्रवाई को अंजाम देकर घर से बाहर निकली तो थोड़ी दूरी पर खड़ी एसयूवी कार पर संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने मनोचा से पूछताछ की तो उन्होंने कार को पहचानने से इंकार कर दिया।

जांच टीम एक बार फिर घर के अंदर जाकर कार की चाबी तलाशने लगी। आखिरकार जांच अधिकारी को एक कार की चाबी दिखाई दी, जिसके रिमोट का बटन दबाते ही बाहर खड़ी एसयूवी शोर मचाने लगी और कार में रखी रकम को जब्त कर लिया गया।

कहां गायब हुई डायरी?

"10 million's arrangements for hush the Yadav Singh matter'

आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान यादव सिंह के घर से एक डायरी बरामद की गई थी। इस डायरी में राजनेताओं, नौकरशाहों और कई ठेकेदारों के नाम बताए जा रहे थे।

ये ऐसे नाम थे, जिनसे यादव सिंह ने लाभ उठाया या फिर उन्हें फायदा पहुंचाया। आयकर की कार्रवाई के बाद डायरी कई दिनों तक सुर्खियों में छाई रही थी।

काली कमाई के गहरे राज खोलने वाली डायरी अचानक कहां गायब हो गई, इसको लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। कैप्टन विकास गुप्ता ने बताया कि आरटीआई के जरिए आयकर विभाग से इसकी जानकारी मांगी गई, लेकिन जवाब देने से मना कर दिया गया।

954 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में यादव सिंह को क्लीन चिट दिए जाने पर सीबीसीआईडी सवालों के घेरे में है। इस मामले की क्लोजर रिपोर्ट संस्था ने आरटीआई के माध्यम से मांगी, लेकिन रिपोर्ट की प्रति देने से इंकार कर दिया गया।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जिन्होंने यादव सिंह को क्लीन चिट दी थी, वे भी सीबीआई जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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