मेयर टीम ने निगमायुक्त पर लगाए 10 आरोप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विवादास्पद भवन ढहाए जाने के एक दिन बाद मेयर और उनकी टीम ने निगमायुक्त पर धावा बोल दिया। निगमायुक्त डॉ प्रवीण कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
उन्हें गुड़गांव के विकास का बड़ा रोड़ा बताया। साथ ही निगमायुक्त के खिलाफ सोमवार को धरना देने का ऐलान भी किया।
शमा रेस्टोरेंट में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में मेयर विमल यादव ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को टूटे भवन से उनका कोई नाता नहीं है।
मेयर ने जमकर खोली पोल
200 करोड़ की डीपीआर पर काम शुरू हो गया था, जिसे निगमायुक्त ने बंद करा दिया। इससे निगम के अंतर्गत आने वाले गांव डुंडाहेड़ा, बादशाहपुर, समसपुर, तिगरा, फाजिलपुर और टीकरी का काम रुक गया है। वहीं सिकंदरपुर मॉर्बल मार्केट को व्यापारियों से खाली करा कर पुलमैन होटल को रास्ता दे दिया गया है।
उन्होंने निगमायुक्त पर टाइल्स सप्लायर और विज्ञापन एजेंसियों से साठगांठ के गंभीर आरोप लगाए। इस मौके पर उनके साथ सीनियर डिप्टी मेयर यशपाल बत्रा, डिप्टी मेयर परमिंदर कटारिया सहित तकरीबन 20 पार्षद मौजूद थे।
ये हैं निगमायुक्त पर लगाए गए 10 आरोप
मनमर्जी से निगम कर्मियों को रिलीव करना जिससे कार्य बाधित। डीपीआर के तहत चल रहे 200 करोड़ के विकास कार्य बंद कराए। आरएमसी सड़कों का निर्माण बंद करा टाइल्स के प्रयोग पर जोर।
टाइल्स वालों से साठगांठ। पुलमैन होटल को पहुंचा रहे हैं फायदा । कंपनियों को निगम की जमीन कब्जाने की छूट। सदर बाजार में दुकानदारों के सामान लोगों में बांटना। घाटा में वन विभाग की जमीन पर हार्वेस्टिंग में करोड़ों खर्च।
एमजी रोड अपने आदमी को दो दुकानें और टॉयलेट दिया। 21यूनिपोल पर विज्ञापन का टेंडर एनएस को दिया। प्राइवेट बिल्डरों को पहुंचा रहे हैं फायदा।
किन-किन पार्षदों ने किया विरोध
भीम सिंह ठाकरान, अशोक पहलवान, अनिल यादव, कालूराम, खजान, विरेंदर यादव, बिंदर गूजर, रविंदर यादव, सुभाष सिंगला, सुभाष फौजी, सतीश यादव, दर्शन सिंह, दलीप साहनी, लखपत काटारिया, योगेंदर सारवान, सोनिया, सुरेश दुआ, महेश दायमा।
हालांकि निगमायुक्त के खिलाफ हमले का जो समय मेयर और उनके समर्थक पार्षदों ने चुना है वह संदेह पैदा कर रही है। सवाल यह है कि अगर वह लगातार विकास कार्यों की उपेक्षा कर रहे हैं तो पहले क्यों आवाज नहीं उठाई गई। विवादित भवन टूटने के बाद ही इनकों विकास कार्यों के बाधित होने का एहसास हुआ।