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नंदा देवी की चोटी में विश्व के अपनी तरह के पहले अभियान को ‘डेयर डेविल्स’ ने दिया अंजाम 

Tue, 25 Jun 2019 08:49 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़
भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 25 Jun 2019 08:49 AM IST
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world first mission carried out by 'Dare Devils' on nanda devi peak
नंदा देवी चोटी पर बर्फ में दबे शव - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

नंदा देवी के पर्वतारोहण अभियान के दौरान लापता हुए पर्वतारोहियों के शवों को निकालने के लिए चलाए गए अभियान को विश्व का सबसे बड़ा और पहला अभियान बताया जा रहा है।

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इस अभियान के तहत भारतीय तिब्बत पुलिस बल के पर्वतारोहियों ने 17,800  फीट  से अधिक ऊंचाई पर बर्फ में दबे शवों को निकाला। मौसम अनुकूल न होने के कारण अब इन शवों को नंदा देवी बेस कैंप तक लाने में भी टीम को खासी जद्दोजहद से गुजरना पड़ रहा है।

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बेहद साहसिक और लगभग असंभव अभियान

13 मई को आठ पर्वतारोहियों का दल 25,636 फीट ऊंची नंदा देवी की चोटी को फतह करने निकला था। इस दल के साथ अनहोनी होने की सूचना 31 मई को मिली। इसके बाद जिला प्रशासन और आईटीबीपी ने शवों को निकालने का एक बेहद साहसिक और लगभग असंभव अभियान का बीड़ा उठाया।

इनके सामने चुनौती कितनी बड़ी थी, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि शेरपा तेनजिंग ने इस चोटी को दुनिया की सबसे दुर्गम चोटी करार दिया था। पर्वतारोहियों के शव भी 17, 800 फीट की ऊंचाई पर पाए गए। मतलब ये शव नंदा देवी की चोटी से मात्र आठ हजार फिट ही दूर थे। नंदा देवी का बेस कैंप ही 13612 फीट की ऊंचाई पर है। 

धैर्य और साहस की परीक्षा देते हुए अभियान को जारी रखा

साफ था कि आईटीबीपी के पर्वतारोहियों को बेस कैंप की सुरक्षा को छोड़कर करीब 4000 फीट और ऊंचाई पर पहुंचकर खोज करनी थी। यह क्षेत्र मौसम के अचानक बदलाव के लिए भी जाना जाता है और आईटीबीपी ने इसका भी सामना किया। इतना होते हुए भी आईटीबीपी की टीम ने धैर्य और साहस की परीक्षा देते हुए इस अभियान को जारी रखा।

15 जून को यह टीम बेस कैंप पहुंची और यहां से आगे बढ़ी। इसके बाद करीब नौ दिन तक इस टीम ने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अब भी टीम को एक लापता पर्वतारोही की खोज करनी है और करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर मिले शवों को 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बेस कैंप तक लाना है।

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अपनी तरह का पहला अभियान

यही वजह है कि 17 हजार फीट की ऊंचाई पर संचालित किए गए इस अभियान को विश्व का सबसे बड़ा और अपनी तरह का पहला अभियान बताया जा रहा है। प्रशासन ने इस अभियान का नाम शायद यही सब देखते हुए 'डेयर डेविल' रखा।   

जिलाधिकारी डा. विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक नंदा देवी पीक में छह हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर यह अभियान आसान नहीं था, लेकिन आईटीबीपी के कुशल पर्वतारोही इसमें सफल रहे। वहां पर मौसम काफी खराब है। निकाले गए शवों को बेस कैंप तक लाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

...पहले कभी नहीं हुई कोशिश 

वर्ष 2007 में पंचाचूली में आरोहण के दौरान सेना के पर्वतारोहियों का छह सदस्यीय दल लापता हो गया था।

इसके बाद 2017 में सेना का सात सदस्यीय दल नंदा देवी चोटी में पर्वतारोहण के दौरान लापता हो गया था। इन पर्वतारोहियों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया। इसका कारण यह भी है कि इस क्षेत्र में बर्फबारी होती रहती है।

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