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उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंची भाजपा विधायक पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला 

Sun, 30 Aug 2020 10:29 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 30 Aug 2020 10:29 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने विधायक और पीड़िता के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत पेश करने को कहा
  • पीड़िता ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की, एक सितंबर को होगी अगली सुनवाई

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Woman who Alleged on bjp mla for sexual Assault Reached Uttarakhand High court
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में भाजपा विधायक पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाने वाली महिला ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज मुकदमे को निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है। एकलपीठ ने पीड़िता और विधायक के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को कोर्ट में पेश करने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सितंबर की तिथि नियत की है।

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न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पीड़िता और उसके दो अन्य सगे-संबंधियों ने याचिका दायर कर उनके खिलाफ देहरादून की नेहरू कॉलोनी थाने में नौ अगस्त को दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है।
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि देहरादून पुलिस ने उनकी शिकायत तो दर्ज नहीं की, लेकिन दबाव में आकर विधायक की पत्नी रीता नेगी के शिकायती पत्र पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़िता ने उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने व विधायक को डीएनए टेस्ट कराने के आदेश देने की मांग की है।
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विधायक की पत्नी ने एफआईआर में महिला पर आरोप लगाया है कि उसने उन्हें फोन कर कहा था कि वह विधायक की बच्ची की मां है और उसकी पांच करोड़ रुपये की मांग नहीं मानी गई तो वह विधायक का राजनीतिक कैरियर बर्बाद करने के साथ परिवार को भी बदनाम कर देगी।

महिला ने ली कोर्ट की शरण, जांच पर उठाए सवाल

विधायक पर आरोप लगाने वाली महिला ने अब कोर्ट की शरण ली है। उसने मुकदमा दर्ज कराने और डीएनए टेस्ट के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया है। महिला ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए और आम व खास में भेद करने का आरोप लगाया। महिला नहीं यह सब जानकारी रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दी।

महिला ने वीडियो के माध्यम से बताया कि उसे पुलिस से कोई आशा नहीं रह गई है, लिहाजा अब वह कोर्ट की शरण ले रही है। महिला के अनुसार कोर्ट ने दो सितंबर को सुनवाई की तिथि नियत की है। उसने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि सिस्टम के दबाव में काम हो रहा है। यही फर्क है कि आम और खास में अंतर किया जा रहा है।

हालांकि पुलिस कप्तान इस मामले में पहले ही कह चुके हैं कि वह किसी प्रकार की कोताही जांच में बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने थाना नेहरू कॉलोनी से पुलिस जांच को हटाकर सीओ सदर को नामित किया था। उनके साथ में एक महिला अधिकारी को भी लगाया गया था। इस मामले में हर पहलू अपर जांच की जा रही है। 

वकील के बयान दर्ज
इस मामले में जांच अधिकारी सीओ मनोज कुमार ने रविवार को वकील के बयान दर्ज किए। यह वही वकील हैं जिन्होंने डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए बाल आयोग को पत्र दिया था। महिला का कहना था कि उसने अपने पति और बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया है। इस बात को वकील ने गलत ठहराया था।

महिला ने बच्ची की जान को बताया खतरा
महिला ने अपनी बच्ची की जान को खतरा बताया है। इस बाबत उसने महिला आयोग को पत्र लिखा है। यह पत्र भी महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इसका आरोप भी महिला ने विधायक पर ही लगाया है।

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