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फिर सुर्खियों में हरक सिंह रावत: राजस्थान में समन्वयक बनाए जाने के सातवें दिन ही विजिलेंस की कार्रवाई

Wed, 30 Aug 2023 11:00 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 30 Aug 2023 11:00 PM IST
सार

हरक पर विजिलेंस की कार्रवाई के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। हरक ने इसे राजनीतिक साजिश के तहत कार्रवाई बताया है।

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Uttarakhand Vigilance action on Congress Leader Harak Singh Rawat  Heat up Politics
हरक सिंह रावत - फोटो : एएनआई

विस्तार

काॅर्बेट टाइगर रिजर्व में कालागढ़ वन प्रभाग के पाखरो टाइगर सफारी निर्माण के बहुचर्चित मामले में एक बार फिर तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत सुर्खियों में हैं। जानकारों का मानना है कि विजिलेंस की कार्रवाई से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से राजस्थान में समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपे जाने के सातवें ही दिन हरक पर विजिलेंस की कार्रवाई के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। हरक ने इसे राजनीतिक साजिश के तहत कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि वह इससे घबराने वाले नहीं हैं।

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उनके बेटे के संस्थान से विजिलेंस की कार्रवाई में करीब 15 लाख रुपये के दो जेनरेटर जब्त किए गए हैं। हरक का दावा है कि ये दोनों जेनरेटर उन्हें तत्कालीन वन मंत्री व कॉर्बेट टाइगर रिजर्व फाउंडेशन के अध्यक्ष की हैसियत से उनके कैंप कार्यालय व आवास के लिए विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद कोरोनाकाल में डीएम देहरादून की ओर से शंकरपुर स्थित उनके बेटे के अस्पताल को चलाने का फैसला लिया गया। अस्पताल में इमरजेंसी हालात से निपटने के लिए दो जनरेटर की व्यवस्था की गई। तत्कालीन डीएफओ किशन चंद ने एक जेनरेटर शंकरपुर अस्पताल पहुंचा दिया।

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हरक ने कहा, जनरेटर वापसी के लिए विभाग को लिखा था पत्र

भाजपा शासनकाल में यह जनरेटर कॉर्बेट पार्क के लिए खरीदे गए थे। इस बाबत, पूर्व वन मंत्री हरक सिंह का कहना है कि जब उन्होंने यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास छोड़ा तो राज्य संपत्ति विभाग अपना सामान ले गया। लेकिन, वन विभाग के अधिकारी इस जेनरेटर को नहीं ले गए। उन्होंने जेनरेटर की वापसी के लिए विभाग को पत्र भी लिखा था। इस बीच डीएफओ किशन चंद एक मामले में जेल चले गए और जेनरेटर की वापसी की प्रक्रिया थम गई।

लोस चुनाव से पहले कानूनी दांवपेच में उलझे हरक

हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की हसरत पालने वाले हरक सिंह कानूनी दांवपेच में उलझते दिखाई दे रहे हैं। पूर्व मंत्री हरक सिंह कर्मकार कल्याण बोर्ड घोटाला, अवैध पेड़ कटान व स्टिंग प्रकरण में सीबीआई और विजिलेंस की जांच का पहले से ही सामना कर रहे हैं। अब जेनरेटर विवाद भी निकल आया है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिन हरक सिंह के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं।

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