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इसलिए अलग-अलग राज्यों में खेलने के लिए भटक रहे हैं खिलाड़ी...

Mon, 18 Sep 2017 02:32 PM IST
अनिल चन्दोला / अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 18 Sep 2017 02:32 PM IST
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uttarakhand players face ignorance in state
ekta bisht

उत्तराखण्ड के अनेक खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उत्तराखण्ड के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के अलावा अन्य राज्यों की टीम में भी शामिल हैं। उत्तराखण्ड में एसोसिशन की आपसी लड़ाई की चलते राज्य गठन के 17 साल बाद भी बीसीसीआई को मान्यता नहीं मिली है। जिस कारण राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ी अलग-अलग राज्यों में खेलने के लिए भटक रहे हैं।   

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मौजूदा समय में प्रदेश के मनीष पांडे, उन्मुक्त चंद, पवन नेगी, ऋषभ पंत, एकता बिष्ट और मानसी जोशी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। आईपीएल समेत अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी यह खिलाड़ी हिस्सा ले चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य खिलाड़ी हैं, जो दूसरे राज्यों की टीम से खेल रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से दून निवासी आर्यन शर्मा (अंडर-16 सेंट्रल जोन के कप्तान), हिमांशु असनोड़ा (यूपी), अभिमन्यु ईश्वरन (पश्चिम बंगाल व इंडिया ब्लू),  पवन सुयाल व राबिन बिष्ट (राजस्थान), स्नेह राणा (रेलवे), सिद्धार्थ (हिमाचल), तनुष (गुजरात) और श्वेता वर्मा (यूपी), आर्येंद्र जुयाल शामिल हैं। इन सभी खिलाड़ियों को अपना सपना पूरा करने के लिए उत्तराखंड छोड़कर दूसरे राज्यों की राह पकड़नी पड़ी है।
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उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही एसोसिएशन को बीसीसीआई की मान्यता दिलाने के प्रयास हुए लेकिन खेल संघों से जुड़े पदाधिकारियों की नाक की लड़ाई के चलते कोई फैसला नहीं हो सका। कई बार बीसीसीआई के स्तर से भी मान्यता को लेकर प्रयास हुए लेकिन एक राय न बनने के चलते यह कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। वर्ष 2015 में अनुराग ठाकुर के बीसीसीआई अध्यक्ष रहने के दौरान राज्य में एक तदर्थ कमेटी भी गठित की गई, जिसको राज्य की एसोसिएशनों के बीच समन्वय स्थापित करने का जिम्मा सौंपा गया। हालांकि यह कमेटी अपना काम पूरा नहीं कर सकी। 2016 में बीसीसीआई की ओर से अंशुमान गायकवाड भी पहुंचे लेकिन राज्य की एसोसिएशनों के झगड़े के चलते बात नहीं बन सकी। 
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इस मामले में खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि हम राज्य ‌क्रिकेट एसोशिएशन को मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए बीसीसीआई और खेल से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से बातचीत के प्रयास किए गए हैं। उनहोने कहा कि मान्यता को लेकर हमारे प्रयास सकारात्मर साबित हुए हैं। जल्द ही एसोसिएशन को एकराय कर मान्यता की बाधाओं को दूर किया जाएगा।

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