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पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं उत्तराखंड के अफसर
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 06 Oct 2016 03:25 AM IST
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अफसर नहीं मान रहे तबादला
- फोटो : डेमो पिक
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अपने ही तबादला आदेशों पर अमल कराने में सरकार को पसीने छूट रहे हैं। ज्यादातर प्रशासनिक अफसर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर को छोड़ पहाड़ों पर तैनाती के इच्छुक नहीं है। सचिवालय में तो यह चर्चा जोरों पर है कि कार्यकाल पूरा करने की ओर बढ़ रही सत्ता का रसूख अब अफसरों को रास नहीं आ रहा है।
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यह पहला मामला नहीं है, जब अधिकारियों ने शासन के आदेश पर अमल से इनकार किया है। इसके पूर्व गढ़वाल के कमिश्नर सीएस नपल्च्याल को कुमाऊं का कमिश्नर बनाया गया, लेकिन वे कुमाऊं नहीं गए। तीन माह पूर्व ऊधमसिंह नगर में आईएएस अधिकारी बीके संत को जिलाधिकारी बनाया गया, लेकिन उन्होंने भी जाने से मना कर दिया। चर्चा यह भी है कि आईएएस अधिकारी रंजना को राघव लांगर के स्थान पर रुद्रप्रयाग का जिलाधिकारी बनाने की तैयारी है, मगर इसमें उन्होंने अनिच्छा जाहिर की है।
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गौरतलब है कि तबादलों को लेकर उत्तराखंड में अफसरों की पहली च्वाइस मैदानी क्षेत्र की होती है। ज्यादातर अफसर मैदानी क्षेत्रों को अपनी पहली पसंद में रखते हैं। वहीं पहाड़ों की दुर्गम स्थितियों समेत अन्य कारणों के चलते कोई भी अधिकारी पहाड़ों पर तैनाती का इच्छुक नहीं है। इस बार भी नई तैनातियों पर न जाने के पीछे यही कारण प्रमुख है।
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डिप्टी कलेक्टर और एडीएम भी बड़ी संख्या में
चुनाव आयोग के निर्देशों पर बीते सप्ताह बड़ी संख्या में डिप्टी कलेक्टर और अपर जिलाधिकारियों की तबादला सूची भी जारी की गई है। इनमें से करीब 20 फीसदी अफसर ऐसे है, जो अपनी नई तैनातियों पर जाने से इनकार कर रहे हैं। शासन में चर्चा है कि ये अफसर भी मैदान से पहाड़ पर न जाने की जिद पर अड़े हैं। मुख्य सचिव ने ऐसे सभी अधिकारियों की सूची तलब की है।