Uttarakhand Nikay Chunav: पहले चाय की दुकान संभाली, अब राजनीति की कमान...अंजना रावत ऐसे बनीं पार्षद
साधारण परिवार में जन्मी अंजना के पिता यहां एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। वर्ष 2011 में उनका देहांत हो गया, जिसके बाद अंजना ने अपने पिता की चाय की दुकान चलाने का निर्णय लिया। अब वह पार्षद बनी हैं।
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श्रीनगर में बाजीरों का बाग पुरानी पीएनबी रोड पर चाय की दुकान चलाने वाली और तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित अंजना रावत ने पार्षद पद पर जीत हासिल की है।
वह यहां वार्ड नंबर 21 से पार्षद पद का चुनाव लड़ीं, जिसमें उन्होंने पूर्व सभासद और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री प्रमिला भंडारी समेत प्रतिद्वंदी कविता रमोला को हराया है।
साधारण परिवार में जन्मी अंजना के पिता यहां एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। वर्ष 2011 में उनका देहांत हो गया, जिसके बाद अंजना ने अपने पिता की चाय की दुकान चलाने का निर्णय लिया।
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इसी से वह परिवार का भरण पोषण और अपने भाई की पढ़ाई का खर्च सहित बहन की शादी भी की। अंजना एमए और एमएसडब्ल्यू उत्तीर्ण है।
श्रीनगर की पहली महापौर आरती भंडारी
पहली बार नगर निगम के लिए हुए चुनाव में श्रीनगर में निर्दलीय प्रत्याशी आरती भंडारी जीत का परचम लहरा कर महापौर चुनी गई हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी आशा उपाध्याय को 1639 मतों से पराजित किया। निर्दलीय आरती को 7959 व भाजपा प्रत्याशी आशा को 6320 मत मिले।