उत्तराखंड: लॉकडाउन के बाद मौज-मस्ती के लिए बदला युवाओं का ठिकाना, रोमांच से भरे हैं देवभूमि के पहाड़
Uttarakhand Tourist Places: पहले युवा मौज-मस्ती के लिए जहां पब, पार्टियों में जाते थे, वहीं अब वह पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। शहर की बात की जाए तो राजधानी से महज 18 किमी की दूरी पर स्थित मालदेवता युवाओं का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा।
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लॉकडाउन के बाद देहरादून के युवाओं के सैर-सपाटे और मौज-मस्ती के ठिकाने भी बदल गए हैं। शहर के शोर शराबे से दूर युवा शांत वादियों में जाकर अपने वीकेंड का लुत्फ उठा रहे हैं। सौंदर्य, आकर्षण और रोमांच से भरे पहाड़ों पर युवा ट्रेकिंग के लिए भी जा रहे हैं। मौज-मस्ती के साथ ही युवा व्लॉग बनाकर पहाड़ों की खूबसूरती से दुनिया को रूबरू करा रहे हैं।
पहले युवा मौज-मस्ती के लिए जहां पब, पार्टियों में जाते थे, वहीं अब वह पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। शहर की बात की जाए तो राजधानी से महज 18 किमी की दूरी पर स्थित मालदेवता युवाओं का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा। यहां प्रकृति का आनंद लेने के साथ ही युवा कैंपिंग, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग का शौक भी पूरा कर रहे हैं।
‘यहां जो सुकून, वो शहर के बीच नहीं’
सहेेलियों के साथ तीन दिन के ट्रिप पर मालदेवता पहुंची आकांक्षा शाह ने बताया कि लॉकडाउन के खुलने का वह बेसब्री से इंतजार कर रहीं थी। कहा कि कोरोना से पहले हम वीकेंड में शहर में पार्टी करते थे, लेकिन जब लॉकडाउन खुलने लगा तो दिमाग में पहले से ही था कि शहर में सहेलियों से मिलने का कोई प्लान नहीं बनाएंगे। शहर में वो सुकून नहीं, जो पहाड़ों पर है। इसलिए हमने मालदेवता का प्लान बनाया। हमने यहां पर बहुत मस्ती की। हमारे शहर से कुछ दूरी पर ही इतनी खूबसूरत जगह है और यहां रोमांच के साधन भी उपलब्ध हैं।
शहर में रहते हैं पर मन पहाड़ों में
मैं और मेरे जैसे युवा, जो घुमक्कड़ किस्म हैं उनके लिए सबसे मुश्किल समय था लॉकडाउन। लॉकडाउन खुला, लेकिन शहर में वह सुकून नहीं मिला। यह कहना है कि पार्थ गुसाईं का। फूलों की घाटी से हाल ही में लौटे दून के पार्थ ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से हर महीने कहीं न कहीं ट्रेकिंग पर जाना होता है। यहां आसपास की खूबसूरत जगह पर तो हम अपना समय बिताने जाते ही हैं, लेकिन हमने शहर से दूर जाने का सोचा और दोस्तों के साथ फूलों की घाटी जाने का प्लान बनाया। कहा कि हमारे उत्तराखंड में इतनी खूबसूरत जगह हैं कि यहां जितना घूम लो, कम है। अब हमारा ज्यादातर ठिकाना पहाड़ों में ही होता है।
दोस्तों संग ट्रेकिंग का लुत्फ उठा रहे भूपेंद्र
शहर के शोर शराबे से दूर भूपेंद्र इन दिनों अपने छह दोस्तों के साथ ट्रेकिंग का मजा ले रहे हैं। भूपेंद्र ने बताया कि लॉकडाउन में दोस्तों के साथ ट्रेकिंग का प्लान बनाया था। इन दिनों हम मद्महेश्वर ट्रेकिंग रुट पर और लौटने की तैयारी कर रहे हैं। कहा कि कोरोना काल के बाद सुकून महसूस करने के लिए पहाड़ों से अच्छी जगह कोई दूसरी नहीं है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून की तलाश हर किसी को है और यह प्रकृति के करीब रहकर ही महसूस किया जा सकता है।