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Exclusive: शोध में खुलासा, घुटने के इंप्लांट से पहले बंडल्ड इंटरवेंशन से बैक्टीरिया का खात्मा जरूरी

Fri, 15 Dec 2023 07:02 PM IST
अलका त्यागी वान्या दीक्षित, अमर उजाला, देहरादून
वान्या दीक्षित, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 15 Dec 2023 07:02 PM IST
सार

कूल्हे और घुटने के इंप्लांटेशन से पहले साबुन से नहाने या एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन लगवाने से शरीर में बैक्टीरिया बचे होने की संभावना रहती है। इससे इंप्लांटेशन फेल हो सकता है।

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Uttarakhand News Research reveals it is necessary to eliminate bacteria through bundled intervention before kn
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

घुटने या कूल्हे के इंप्लांट से पहले शरीर में मौजूद बैक्टीरिया खात्मा जरूरी होता है। इसके लिए दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के माइक्रोबॉयोजॉली विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दीपक जुयाल ने नई तकनीक पर शोध किया है। उस तकनीक का नाम है- बंडल्ड इंटरवेंशन। मालूम हो कि अब तक विशेषज्ञ इंप्लांट से पहले बैक्टीरिया नष्ट करने के लिए एंटीबॉयोटिक साबुन से नहाने और इंजेक्शन की सलाह देते रहे हैं।

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कूल्हे और घुटने के इंप्लांटेशन से पहले साबुन से नहाने या एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन लगवाने से शरीर में बैक्टीरिया बचे होने की संभावना रहती है। इससे इंप्लांटेशन फेल हो सकता है। ऐसे में नई तकनीक बंडल्ड इंटरवेंशन पर शोध के बाद डॉक्टरों ने इसी के जरिये बैक्टीरिया नष्ट करने पर जोर दिया है। एक शोध में इस तकनीक ने खुद को साबित भी किया है। इस संबंध में दून अस्पताल के डॉ. दीपक जुयाल का शोध अमेरिकन जर्नल ‘सर्जिकल इंफेक्शंस’ में अगस्त 2023 में प्रकाशित हुआ है।
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डॉ. जुयाल ने बताया कि शोध के दौरान 48 मरीज ऐसे लिए गए जिन्होंने नहाने और बैक्टीरिया नष्ट करने का इंजेक्शन लेने के बाद इंप्लांट सर्जरी करवाई थी। दूसरी ओर 50 ऐसे मरीज लिए गए जिनके शरीर से बंडल्ड इंटरवेंशन तकनीक से बैक्टीरिया नष्ट किए गए थे। शोध का परिणाम यह रहा कि जिन्होंने बंडल्ड इंटरवेंशन तकनीक अपनाई थी इन मरीजों को बैक्टीरिया इंफेक्शन न के बराबर रहा। जबकि, नहाने के बाद इंप्लांट सर्जरी करवाने वाले मरीजों में बैक्टीरिया इंफेक्शन अधिक देखने को मिला। 2017 से 2021 तक यह शोध चला है। सर्जरी होने के बाद एक से तीन साल तक मरीजों का फॉलोअप भी किया गया।
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इंप्लांट फेल होने पर दोबारा डालना पड़ता
किसी भी मरीज में घुटना या कूल्हा रिप्लेसमेंट के दौरान इंप्लांट डालने पड़ते हैं। अगर शरीर में बैक्टीरिया मौजूद हैं तो इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे में घुटना और कूल्हा का इंप्लांट फेल हो जाता है। ऐसे में दोबारा सर्जरी कर इंप्लांट डालना पड़ता है। ऐसे में मरीज का दोगुना खर्च होता है, क्योंकि इंप्लांट का खर्च अधिक आता है।

नाक और बगल से लिए सैंपल
डॉ. दीपक ने बताया कि बंडल्ड इंटरवेंशन में नाक और बगल से सैंपल लेकर बैक्टीरिया की जांच की जाती है। बैक्टीरिया मिलने पर इनका इलाज किया जाता है। इसके बाद ही सर्जरी प्लान की जाती है। दून अस्पताल में जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस शोध में दिल्ली एम्स ने डॉ. बेनु धवन, डॉ. ज्योति रावरे, डॉ. मैत्रेई, डॉ. टीएन वेलपांड्यन, डॉ. श्रीनिवास, डॉ. भावुक गर्ग, डॉ. राजेश मल्होत्रा सहयोग किया।

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