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उत्तराखंड : सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों की सरकारी विभागों में पुनर्नियुक्ति पर लगाई गई रोक

Wed, 09 Sep 2020 04:31 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 09 Sep 2020 04:31 PM IST
सार

  • कसा शिकंजा: कार्मिक की अनुमति के बिना पुनर्नियुक्ति को माना जाएगा अवैध
  • प्रस्ताव देने वाले विभाग लिखकर देंगे कि उनके यहां कोई योग्य व्यक्ति ही नहीं 

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Uttarakhand news : reappointment of retired officers and employees in government departments stops
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : पीटीआई (file photo)

विस्तार

सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों को फिर से विभागों में तैनाती (पुनर्नियुक्ति) देने या अनुबंध पर रखने पर शासन ने सशर्त रोक लगा दी है। कहीं अगर तैनाती देनी भी है तो संबंधित विभाग को यह लिखकर देना होगा कि विभाग में पद को धारण करने वाला कोई योग्य व्यक्ति नहीं है। पदोन्नति में इस तरह के प्रमाण पत्र को भी परखा जाएगा और इस तरह के अक्षम अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भी विचार किया जाएगा।

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मुख्य सचिव ओम प्रकाश की ओर से जारी आदेश के मुताबिक विभागों में पुनर्नियुक्ति किए गए अधिकारी छह माह से लेकर एक साल के अंदर-अंदर विभाग के अन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
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जिन विभागों में सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से अधिक है, वहां किसी भी सूरत में पुनर्नियुक्ति नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने यह भी कहा है कि कार्मिक और सर्तकता विभाग की सहमति के बिना की गई पुनर्नियुक्ति को गंभीर कदाचार माना जाएगा और ऐेसे मामलों में पुनर्नियुक्ति अधिकारी का वेतन रोका जाएगा।

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शासन की नाराजगी

2013 में पुनर्नियुक्ति को लेकर आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद भारी भरकम ढांचा होते हुए भी कई विभागों में पुनर्नियुक्ति की परंपरा बन गई है। कार्मिक की समस्या यह है कि कार्मिक एवं सतर्कता विभाग पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को खारिज कर देता है तो संबंधित विभाग सीएम से अनुमोदन कराकर तैनाती दे रहे हैं। कई मामलों में तो चार या पांच या इससे भी अधिक कार्मिकों को इस तरह से पुनर्नियुक्ति दी जा रही है।

...तो न आती नौबत

मुख्य सचिव के मुताबिक विशेष दक्षता वाले कामों को करने के लिए समय रहते अगर अन्य कार्मिकों को तैयार कर लिया जाता तो पुनर्नियुक्ति की नौबत न आती। ऐसे में आदेश दिया गया है कि पुनर्नियुक्ति वाले अधिकारी छह माह के अंदर अन्य कार्मिकों को प्रशिक्षण देकर योग्य बनाएंगे।

सामान्य मामलों में भी दी जा रही है पुनर्नियुक्ति

हैरान करने वाली बात यह है कि विभागों में समूह ग और घ के पदों पर भी पुनर्नियुक्ति की जा रही है। इन पदों के लिए किसी विशेष तकनीकि ज्ञान या दक्षता की जरूरत नहीं होती है। मुख्य सचिव ने ऐसे मामलों के सामने आने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। 

राज्य को हो रहा है दोहरा नुकसान

आदेश के मुताबिक पुनर्नियुक्ति के कारण राज्य को वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ रहा है । इसके साथ ही संबंधित विभाग के योग्य अधिकारियों की क्षमता का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।

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