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जंगल के संरक्षण का जज्बा या बेरोजगारी: एमटेक, बीटेक, डिग्रीधारक युवा बनेंगे फॉरेस्ट गार्ड, 17 ने किया ज्वॉइन

Thu, 25 Nov 2021 12:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 25 Nov 2021 12:37 PM IST
सार

वन विभाग में ऐसे ही एमटेक, बीटेक, एमबीए और एमकॉम की डिग्री धारक 17 वन आरक्षियों ने देहरादून वन प्रभाग में अपनी ड्यूटी ज्वाॅइन की।

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uttarakhand news: MTech, BTech and other degree holders youth will become forest guard in forest department
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

वन विभाग में तमाम ऐसे भी वन आरक्षी सेवाएं देने के लिए आगे आ रहे हैं जो एमटेक, बीटेक, एमबीए और एमकॉम की डिग्री धारक हैं, वरन उनमें वन्यजीवों व जंगलातों के संरक्षण को लेकर जबरदस्त जज्बा भी दिखाई दे रहा है।

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वन आरक्षी विभाग की मूलभूत कड़ी
वन विभाग में ऐसे ही 17 वन आरक्षियों ने बुधवार को देहरादून वन प्रभाग में अपनी ड्यूटी ज्वाॅइन की। इस मौके पर मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) सुशांत पटनायक ने विभाग में बतौर वन आरक्षी ड्यूटी ज्वाॅइन करने वाले युवाओं को उनकी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में अवगत  कराया।
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मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक ने कहा कि वन आरक्षी विभाग की मूलभूत कड़ी हैं और उनके ऊपर वन, पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुशांत पटनायक ने वन आरक्षियों के अभिलेखों को भी जांचा। पटनायक के साथ तमाम अधिकारी उस समय चकित रह गए, जब कई वन आरक्षियों ने बताया कि वे एमटेक, बीटेक, एमबीए और एमकॉम डिग्री धारक हैं। 

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इस मौके पर उपस्थित वन संरक्षक (शिवालिक वृत्त) अखिलेश तिवारी ने कहा कि वन आरक्षियों का वन्यजीवों व जंगलों के संरक्षण में अहम योगदान होता है। वन आरक्षी ही वन्यजीवों व जंगलों के साथ अपना ज्यादा वक्त गुजारते हैं।प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने बताया कि नवनियुक्त वन आरक्षियों के लिए प्रभागीय स्तर पर प्रोग्राम चलाया जा रहा है ताकि वह रेंजों में जाने से पहले विभाग के बारे में पूरी तरह जागरूक हों।


वन्यजीवों व जंगलों के संरक्षण का जज्बा

मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक और वन संरक्षक अखिलेश तिवारी के साथ वार्ता के दौरान सभी वन आरक्षियों ने कहा कि उनमें तकनीकी और प्रबंधन की डिग्री होने के बावजूद वन्यजीवों व जंगलों के संरक्षण का जज्बा है। लिहाजा वे वन आरक्षी के तौर पर सेवा देने को आगे आएं हैं। सभी वन आरक्षियों ने आश्वासन दिया कि वे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही वन्यजीवों और जंगलों के संरक्षण में अपना पूरा योगदान देंगे। 

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