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उत्तराखंड : अवैध खनन का खेल, बाइक और स्कूटी पर पिथौरागढ़ से बाजपुर पहुंचा दिया 200 क्विंटल खनिज

Fri, 28 May 2021 01:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर
चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 28 May 2021 01:44 PM IST
सार

पहाड़ों के पट्टों की रॉयल्टी की आड़ में क्रशरों में खप रहा चोरी का खनिज, कोसी नदी का सीना चीरकर निकाला जा रहा सफेद सोना।

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uttarakhand news : illegal mining, 200 quintals of minerals haul from Pithoragarh to Bazpur on bike and scooty
खनिज - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

स्कूटी, मोटरसाइकिल या ऑटो रिक्शे पर क्या 150 से लेकर 200 क्विंटल तक उपखनिज ले जाया जा सकता है। कोई भी इस सवाल को सुनकर हैरान होगा, लेकिन अवैध खनन के खेल में ये सब हो रहा है। कुछ क्रशरों में खपाए गए अवैध खनिज से संबंधित दस्तावेज इसकी गवाही दे रहे हैं।

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एक क्रशर पर वाहनों के जिन नंबरों से पिथौरागढ़ की रॉयल्टी पर वहां से खनिज लाया जाना दर्शाया गया है वे नंबर बोलेरो, स्कूटी, ऑटोरिक्शा, बाइक आदि के हैं। सरकार को राजस्व का चूना लगाने वाले इस मामले की जांच हो तो बड़ा गड़बड़झाला सामने आ सकता है। 
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प्रशासनिक मशीनरी के कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने में व्यस्त रहने का फायदा उठाकर बाजपुर क्षेत्र में कोसी नदी में धड़ल्ले से अवैध खनन कर उपखनिज (आरबीएम) निकाला गया है। चोरी के उपखनिज को कुछ क्रशरों में खपाने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया।
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एक तो यह कि पिथौरागढ़ से वहीं की रॉयल्टी पर यह उपखनिज लाया गया है। जिन नंबरों के वाहन से ये उपखनिज लाया जाना दिखाया गया है, अमर उजाला की पड़ताल में ये नंबर बोलेरो, चार ऑटो रिक्शा, चार कार, दो स्कूटी, एक बाइक और एक गुड्स कैरियर का निकला है। इन वाहनों से 150, 180 और 200 क्विंटल तक खनिज लाना कागजों में दर्ज है।

तेज रफ्तार से चलने वाली एक कार को पिथौरागढ़ से बाजपुर पहुंचने में साढ़े छह से सात घंटे का समय लगता है, लेकिन वहां से खनिज भरकर भारी वाहन इतने ही समय में वाहन बाजपुर पहुंचना दर्शाया गया है।

पता चला है कि पर्वतीय क्षेत्रों से सिर्फ रॉयल्टी ही आती है और खनिज कोसी नदी में अवैध खनन कर निकाला गया होता है। ये तथ्य पिथौरागढ़ के एक पट्टे की रॉयल्टी से क्रशर में तीन दिन में 60 वाहनों से पहुंचाए गए खनिज की पड़ताल में सामने आए हैं। सिर्फ तीन दिन में 60 वाहनों की पड़ताल में 17 वाहनों के नंबर कार, बाइक, बोलेरो या थ्री व्हीलर के निकले। 19 नंबरों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। यदि ईमानदारी से पर्वतीय क्षेत्रों से लाए गए खनिज के संबंध में जांच हो तो करोड़ों का खेल सामने आ सकता है। 

खोदाई वाली मशीन से ढो दिया 200 क्विंटल खनिज 

अवैध खनन के खेल को कागजों के हेरफेर में सही दर्शाने की कोशिश में कारोबारी मात खा गए। उन्होंने कुछ नंबर तो ठीक दर्ज किए, लेकिन जल्दबाजी में फर्जी नंबर दर्ज कर डाले। पिथौरागढ़ से एक्सकेवेटर (खोदाई करने वाली भारी मशीन) में 200 क्विंटल खनिज लाना दर्शाया गया है, जबकि इस मशीन का इस्तेमाल खोदाई करने और मिट्टी हटाने में किया जाता है। इसी तरह पहाड़ों पर नहीं चल सकने वाले ट्रेलर के नंबर को भी कागजों में दर्शाकर पिथौरागढ़ से खनिज लाना दिखाया गया है।

वन चौकियों में दर्ज होते हैं वाहन 
पिथौरागढ़ से बाजपुर आने तक तीन जिलों की सड़कों में कई वन चौकियां पड़ती हैं। इन चौकियों से उपखनिज लेकर गुजरने वाले वाहनों की एंट्री होती है। पहाड़ों से सिर्फ कागज ही आए और खनिज नहीं आया तो इनकी एंट्री इन चौकियों में भी दर्ज नहीं होगी। जांच होने पर गड़बड़ी साफ पकड़ में आ सकती है।

पिथौरागढ़ में पांच और बाजपुर में 13 रुपये क्विंटल है रॉयल्टी की दर 
खनन विभाग अलग-अलग नदियों में उसी हिसाब से रॉयल्टी की दर निर्धारित करता है। पिथौरागढ़ में रिवर ट्रेनिंग के लिए दिए पट्टों में रॉयल्टी की दर पांच रुपये प्रति क्विंटल है। बाजपुर क्षेत्र में पट्टों पर रॉयल्टी की दर 13 रुपये प्रति क्विंटल है। बताया जा रहा है कि कुछ क्रशर संचालक स्थानीय पट्टों से बेहद कम मात्रा में खनिज लेते हैं। पिथौरागढ़ से सिर्फ रॉयल्टी मंगा ली जाती हैं, जबकि माल नदी से अवैध तरीके से निकाला जाता है। पट्टा संचालकों से खनिज खरीदने के लिए रेट भी कम कर दिए जाते हैं, ताकि मजबूरी में वे अपना माल बेच दें।

उपखनिज कहां जा रहा 
पर्वतीय क्षेत्रों के कुछ पट्टाधारकों की मिलीभगत भी इस खेल में है। सिर्फ रॉयल्टी देने वाले पहाड़ का पट्टा संचालक अपने पट्टे का उपखनिज कहां बेच रहे हैं, यह भी जांच का विषय है। अगर वे बिना रॉयल्टी माल बेच रहे हैं तो यह भी गैरकानूनी है। यदि रिवर ट्रेनिंग के नाम पर लिए गए पट्टे से खनिज नहीं निकाला जा रहा है तो यह भी नियम का उल्लंघन ही है। 

चुनिंदा तय तारीखों में मिलीभगत से होता है अवैध खनन 

अवैध खनन का खेल योजनाबद्ध तरीके से खेला जाता है। सूत्रों के अनुसार हफ्ते में एक रात अवैध खनन के लिए तय होती है। इस रात कोसी नदी में बड़े पैमाने पर जेसीबी और मशीनों से उपखनिज निकाला जाता है। इसके बाद सड़कों से बेरोकटोक ओवरलोडेड वाहन माल को स्टॉक या क्रशरों में पहुंचाते हैं। इस दौरान सड़क पर इन चोरी का उपखनिज ले जाते वाहनों को नहीं रोका जाता है।

अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस, राजस्व, वन और खनन विभाग को कड़े निर्देश दिए गए हैं। अगर अवैध खनन कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है तो इसकी जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी की मिलीभगत पाई गई तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।
- रंजना राजगुरू, डीएम

नदियों में अवैध खनन नहीं हो रहा है। यदि पर्वतीय क्षेत्रों की सिर्फ रॉयल्टी लाकर यहां की नदियों का उपखनिज उसमें दर्शाया जा रहा है तो यह गलत है। इस मामले को दिखवाया जाएगा। अगर किसी की लिप्तता मिली तो कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
- दलीप सिंह कुंवर, एसएसपी

पर्वतीय क्षेत्रों के पट्टों की रॉयल्टी में उपखनिज का फर्जी परिवहन दर्शाना गंभीर है। किन क्रशरों में पर्वतीय क्षेत्रों के पट्टों से खनिज लाया गया है, उसको दिखवाया जाएगा। जिन वाहनों से खनिज लाया गया है, उसे आरटीओ से सत्यापित कराया जाएगा। पूरे मामले में जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
- दिनेश कुमार, उपनिदेशक, खनन विभाग

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