उत्तराखंड: एक मंच पर आए पूर्व विधायकों ने बनाया संगठन, लाखीराम जोशी को कमान, भीमलाल आर्य सचिव
संगठन बनाने के बाद पूर्व विधायक विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण से उनके यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर मिले और उनसे संरक्षण मांगा।
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अपने मसलों और राज्य के सरोकारों को लेकर पूर्व विधायक लामबंद हो रहे हैं। दलगत और वैचारिक मतभेद छोड़कर उन्होंने उत्तराखंड पूर्व विधायक संगठन का गठन किया है। अंतरिम सरकार में मंत्री रहे लाखीराम जोशी को संगठन की बागडोर सौंपी गई है जबकि पूर्व विधायक भीमलाल आर्य को सचिव बनाया गया है।
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संगठन बनाने के बाद पूर्व विधायक विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण से उनके यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर मिले और उनसे संरक्षण मांगा। उन्होंने स्पीकर से विधानसभा की समिति की तरह ही पूर्व विधायकों की भी एक सांविधानिक समिति बनाने का अनुरोध किया। स्पीकर ने उनके इस सुझाव का स्वागत किया और इस पर विचार करने का भरोसा दिया।
जोशी के मुताबिक, दिसंबर में पूर्व विधायकों का एक सेमिनार देहरादून में होगा, जिसमें संगठन का एजेंडा तय होगा। उनका कहना है कि ये एक गैर राजनीतिक संगठन है और राज्य के ज्वलंत मुद्दों को सरकार के समक्ष रखेगा। पूर्व विधायकों को कोई नहीं पूछ रहा संगठन के औचित्य के सवाल पर जोशी ने कहा कि पूर्व विधायकों को कोई नहीं पूछ रहा। सरकार उन्हें महत्व नहीं दे रही जबकि उनमें से कई यूपी के समय के विधायक रहे और उनका लंबा अनुभव रहा है। वे क्षेत्र की जनता और सरोकारों से लगातार जुड़े हुए हैं।
148 पूर्व विधायकों से साधेंगे संपर्क
पूर्व विधायक संगठन सभी जिलों में प्रभारी बनाकर उन्हें सभी पूर्व विधायकों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी देगा। जोशी के मुताबिक, प्रदेश में करीब 148 पूर्व विधायक हैं।
हरक, बिष्ट, कर्णवाल, चैंपियन सहित 35 पूर्व विधायक बैठक में शामिल हुए
पूर्व विधायक संगठन के अध्यक्ष लाखी जोशी ने दावा किया कि बैठक में 35 पूर्व विधायकों ने शिरकत की। इनमें कुछ पूर्व विधायक बीच-बीच में आते और जाते रहे। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, देशराज कर्णवाल, राजेश जुंवाठा, मातबर सिंह, गोविंद लाल शाह, मुन्नी देवी, विजय सिंह पंवार, ओम गोपाल रावत ने बैठक में भाग लिया।
रिटायर्ड अफसरों को पुनर्नियुक्ति देने पर उठाया सवाल
पूर्व विधायक संगठन के अध्यक्ष जोशी ने राज्य में सेवानिवृत्ति के बाद अफसरों को पुनर्नियुक्ति देने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ पूर्व विधायकों की राय को महत्वहीन माना जाता है। जिनका सेवा में रहकर योगदान शून्य है, उन्हें अधिकारी रिटायर होते हैं तो उन्हें तुरंत नियुक्ति मिल जाती है। ये बहुत खराब परंपरा है।
बैठक में उठा पेंशन और ब्याज मुक्त ऋण का मुद्दा
बैठक में पूर्व विधायकों ने पेंशन और ब्याज मुक्त ऋण के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने पेंशन बढ़ाने और पूर्व विधायकों को ब्याज मुक्त ऋण देने और समय-समय पर उनकी सुविधाओं का ख्याल रखने पर जोर दिया।
कुछ दिन पहले कुछ पूर्व विधायक मुझसे मिले थे। उनका सुझाव था कि वे प्रदेश हित में सरकार और विधानसभा के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। पूर्व विधायक जनता से जुड़े हैं। वे जमीनी हकीकत जानते हैं। अनुभवी पूर्व विधायकों के पास कई ऐसे सुझाव हैं, जो सदन के संचालन और मजबूती और उसकी गरिमा को बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं।
- ऋतु खंडूड़ी भूषण, अध्यक्ष, विधानसभा