गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक के सहारे कई राजनीतिक दलों के मुखिया यहां हाजिरी लगाते रहे हैं। रविवार को यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी मत्था टेककर दुआ मांगी। इसके कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन इस सरजमीं पर सिर झुकाने वाली देश की शख्सियतों की लंबी फेहरिस्त है।
उत्तराखंड : पिरान कलियर दरगाह पर कई पूर्व प्रधानमंत्री समेत अनगिनत शख्सियत टेक चुकी हैं मत्था
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी मत्था टेककर दुआ मांगी।
स्थानीय बाशिदों के दिलों में इस बात की टीस है कि राजनीतिक शख्सियतें यहां आकर मत्था तो टेकती हैं, लेकिन इस विश्व प्रसिद्ध स्थल को सम्मान और दर्जा दिलाने के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के विधानसभा चुनाव से पहले साबिर पाक की दरगाह पहुंचने के कई सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकार इस उधेड़बुन में हैं कि क्या साबिर पाक के सहारे सपा जिले में राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। सज्जादानशीन शाह एजाज साबरी ने बताया कि पूर्व सीएम अखिलेश यादव पहली बार पिरान कलियर आए हैं। पूर्व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी यहां कभी नहीं आए।
हालांकि यूपी सरकार में मंत्री रहे शिवपाल यादव और अमर सिंह यहां पहुंच चुके हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से बात करें तो जिले में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी के निवास करने के बाद भी सपा ज्यादातर चुनावों में हाशिये पर ही रही है। हालांकि राज्य के गठन के बाद यहां सपा सांसद राजेंद्र बॉडी चुनावी लहर में जीते थे। इसके बाद से सपा को कोई भी कामयाबी नहीं मिल सकी है। ऐसे में राज्य के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सीएम अखिलेश यादव के कलियर पहुंचने को लेकर सियासत गरमा गई है।
इन खास शख्सियतों ने टेका मत्था
- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
- पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी
- पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा
- पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाब नबी आजाद
- पूर्व राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला
- कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला
- पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद
- पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर
- पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल
- फिल्म अभिनेता गोविंदा
- भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन
- भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी
इस पवित्र धरती पर कई पूर्व प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पहुंचे हैं। सभी ने वादे तो किए हैं, लेकिन पूरे नहीं हुए हैं। कलियर को आज तक पांचवें धाम का दर्जा नहीं मिल सका। उर्दू फारसी अकादमी और यूनानी मेडिकल कॉलेज की स्थापना जैसी घोषणाएं भी पूरी नहीं हो सकीं।
- शाह अली एजाज साबरी, सज्जादानशीन