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कैग रिपोर्ट : संक्रमण की रोकथाम के लिए उत्तराखंड के जिला अस्पतालों की तैयारियां अधूरी
Mon, 08 Mar 2021 01:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 08 Mar 2021 01:30 PM IST
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महालेखा परीक्षक
प्रदेश के जिला, महिला और संयुक्त अस्पतालों में संक्रमण को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ये अस्पताल हवा और सतह के संक्रमण की नियमित रूप से जांच भी नहीं कर रहे हैं और इनके पास जरूरी उपकरणों, बेहतर सेवाओं का भी अभाव है। अब सरकार अलग से इसके लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी। अस्पतालों की यह कमी कोरोना काल में खतरनाक साबित हो सकती है।
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महालेखा परीक्षक ने वर्ष 2014 से 2019 तक की संक्रमण की रोकथाम को लेकर अनुपालन लेखा परीक्षा की। इसमें देखा गया कि सतह और हवा के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अस्पताल क्या कर रहे हैं और मानकों का कितना पालन किया जा रहा है।
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प्रदेश में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च 2020 केे सामने आया था। इसके बाद अस्पतालों में सैनिटाइजर, सामाजिक दूरी आदि का पालन किया गया, लेकिन हाउस कीपिंग, संक्रमण की जांच, उपकरणों आदि पर ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह रही कि अस्पतालों में कोरोना संक्रमण के उपचाराधीन रोगियों की ओर से कई तरह की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। अब कैग रिपोर्ट में सामने आया कि अस्पताल संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए व्यवस्थित ही नहीं हैं।
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ओटी में किया जाता रहा रसायनिक गैसों का उपयोग
सेंटर फॉर डिजीज ऑपरेशन थियेटर में रसायनिक गैसों से संक्रमण खत्म करने की पैरवी नहीं करता। इसके बजाय कमरे के तापमान, आर्द्रता और हवा के पर्याप्त और अबाध प्रवाह का सुझाव दिया जाता रहा है। अल्मोड़ा, हरिद्वार और चमोली के अस्पतालों में रसायनिक गैसों का उपयोग किया जाता रहा। फांगिंग के बाद किसी भी अस्पताल में हवा की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई।
डाक्टर, नर्स आदि के हाथों में भी मिला संक्रमण
कैग ने लेबर रूम, ओटी, पैथोलॉजी लैब आदि में सतह के संक्रमण का पता लगाने के लिए डॉक्टरों, नर्सों आदि के हाथों की जांच भी करवाई। पाया गया कि ऊधमसिंह नगर अस्पताल की पैथोलॉजी लैब और जनरल वार्ड में संक्रमण मिला। छह मेें से दो अस्पतालों के वार्डों में नमी पाई गई।
हवा में संक्रमण में वृद्धि मिली
कैग ने ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और चमोली के अस्पतालों में हवा में संक्रमण के लिए जांच की। पाया गया कि इन सभी अस्पतालों में संक्रमण बढ़ा हुआ मिला। कोई भी अस्पताल हवा, सतह और हैंड स्वैब संक्रमण की जांच रिपोर्ट तैयार नहीं कर रहा है।