उत्तराखंड: पुष्कर सिंह धामी के सामने अल्प कार्यकाल में पहाड़ पर 'पहाड़' सी चुनौतियां
नए मुख्यमंत्री भी ऐसे समय में कार्यकाल संभाल रहे हैं, जब मानसून सीजन शुरू हो गया है।
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उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता के माहौल में नए मुख्यमंत्री के सामने पहाड़ पर पहाड़ सी चुनौतियां हैं। तमाम मौर्चों पर जूझने के अलावा मानसून सीजन में घटने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने इस राज्य में हर मुख्यमंत्री की परीक्षा ली है।
करीब हफ्तेभर पहले मानसून की पहली ही बारिश ने यहां की 1700 से अधिक सड़कों को अवरुद्ध कर दिया था। इनमें से कुछ सड़कें अब भी बंद हैं। ऑल वेदर रोड का काम कहीं पूरा हो गया है तो कहीं अब भी चल रहा है। जिसके चलते कमजोर हुए पहाड़ रोज दरक रहे हैं।
आए दिन भूस्खलन की घंटनाएं सामने आ रही हैं। कोविड के चलते चारधाम यात्रा शुरू नहीं हो पाई है। लेकिन देर-सवेर यात्रा को शुरू कराना और सुचारु रखना भी सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध इस राज्य में हाल में सरकार ने जीडीपी के साथ जीईपी को लागू करने की घोषणा की है। जीईपी का लाभ सीधे तौर पर इस राज्य को कैसे मिले, यह भी एक पहलू है।
पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन की दूसरी चुनौतियां भी सामने हैं। नए मुख्यमंत्री धामी को भले ही उतना प्रशासनिक अनुभव न हो, लेकिन वे जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति माने जाते हैं। ऐसे में पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ी समस्याओं का वे सफलतापूर्वक निदान निकाल पाएंगे, ऐसी उम्मीद की जा रही है।
चर्चाओं में सुबह से दोपहर तक बदलते रहे मुख्यमंत्री
बीजापुर गेस्ट हाउस में शनिवार सुबह से खूब चहलपहल रही। नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी केवल यह दोहराते रहे कि आलाकमान तय करेगा। वहीं, मीडियाकर्मी एवं पार्टी के कुछ कार्यकर्ता कयासबाजी के बीच दोपहर तक मुख्यमंत्री बदलते रहे।
पहले सतपाल महाराज और डॉ.धन सिंह रावत में से किसी एक के सीएम होने की कयासबाजी लगती रही, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ संभावित मुख्यमंत्री के नाम भी बदलते रहे। कभी बिशन सिंह चुफाल तो कभी हरक सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और फिर पुष्कर सिंह धामी के नाम चर्चाओं में तैरते रहे। सुबह 11.25 बजे पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र तोमर बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंचे।
उन्होंने कहा कि विधायकों से बात करने के बाद ही सीएम पद के लिए नाम तय होगा। बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंचे भाजपा सांसद अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा का सिस्टम आर्मी की तरह है, किसी को भी कोई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बीजापुर गेस्ट हाउस में दोपहर 2.30 बजे तक पार्टी पदाधिकारियों की बैठक होती रहे। इसके बाद सभी पदाधिकारी भाजपा कार्यालय के लिए रवाना हुए। जहां हुई विधायक मंडल की बैठक में धामी के नाम पर मुहर लग गई।