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स्टिंग ऑपरेशन उत्तराखंड के इन राजनेताओं की जिंदगी में ला चुका 'तूफान', ऐसे उठा बड़े ‘खेलों’ से पर्दा

Mon, 29 Oct 2018 08:21 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Oct 2018 08:21 AM IST
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Uttarakhand Many Politicians Stuck in Sting operation
प्रतीकात्मक तस्वीर

स्टिंग ऑपरेशनाें के निशाने पर पहले भी प्रदेश का मुख्यमंत्री कार्यालय आ चुका है। उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का हुआ है। समाचार चैनलों में रावत अल्पमत में आई कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ करते दिखाई दिए।

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इस प्रकरण की सीबीआई जांच कर रही है। इसके अलावा कुछ मंत्री, विधायक और आईएएस अफसर भी स्टिंग का दंश झेल चुके हैं। चर्चाएं यह भी हैं कि खुफिया कैमरों से प्रदेश में कई और बड़े ‘खेल’ भी हुए हैं।
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वर्ष 2016 में प्रदेश की सियासत को कई बड़े स्टिंग ऑपरेशनों ने हिलाकर रख दिया। मार्च, 2016 को कांग्रेस से नौ विधायकों के भाजपा में शामिल होने से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार अल्पमत में आ गई। 

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इस दौरान चले सियासी उठक पटक के बीच रावत का एक स्टिंग ऑपरेशन एक निजी चैनल पर ऑन एयर हुआ। सत्ता बचाने के लिए हरीश रावत एक बिचौलिये से विधायकों की खरीद फरोख्त की कोशिश करते दिखे।

इस वीडियो में एक मंत्री हरक सिंह रावत की आवाज भी सुनाई दी थी। इस स्टिंग के सार्वजनिक होते ही सियासी हड़कंप मच गया। रावत अपनी सत्ता बचाने में तो कामयाब रहे, लेकिन मामले में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर लिया।

इसके बाद हरीश रावत के करीबी विधायक मदन बिष्ट का स्टिंग सामने आया। बिष्ट पूर्व मंत्री हरक सिंह के बीच की सरकार बचाने को लेकर गोपनीय बातचीत ऑन एयर हो गई। रावत सरकार के स्टिंग का शोर थमा भी नहीं था कि उनके सचिव मोहम्मद शाहिद का पुराना स्टिंग गर्मा गया।

शाहिद पर आरोप है कि आबकारी नीति को लेकर कुछ डील कर रहे थे। इन स्टिंग ऑपरेशनों का सूत्रधार वही निजी चैनल है, जिसके सीईओ उमेश कुमार शर्मा को पुलिस ने रविवार को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया।

उमेश कुमार पर कई सवाल तब भी खड़े हुए थे। ताजा प्रकरण में पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार इस बार फिर उनके निशाने पर सीएम कार्यालय ही था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और उनके प्रमुख सचिव ओम प्रकाश के साथ मुख्य सचिव तक को खुफिया कैमरे में कैद करने की कोशिश थी। 

इसके अलावा भी प्रदेश में कई स्टिंग गिरोह सक्रिय होने की चर्चा रही है। उगाही की मंशा से ‘स्टिंगबाज’ मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को खुफिया कैमरे में कैद करने की कोशिश में रहते हैं। बसपा के एक विधायक भी इनके जाल में फंस चुके हैं।

केवल बड़े राजनेताओं को ही नहीं बल्कि छोटे अधिकारियों को फांसने का खेल भी प्रदेश में हो चुका है। सचिवालय के दो अधिकारी स्टिंग ऑपरेशन का शिकार हुए थे। इसके अलावा कई वीआईपी के स्टिंग प्रकरण केवल चर्चा तक सीमित रहे। 

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