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Uttarakhand Lockdown: दूसरे राज्यों के फंसे लोग अपने घरों को हुए रवाना, चेहरे पर दिखी खुशी और राहत

Sat, 02 May 2020 06:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 02 May 2020 06:46 PM IST
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uttarakhand lockdown latest news : other state stuck people departure for their home
उत्तराखंड में लॉकडाउन - फोटो : amar ujala

प्रदेश सरकार ने शेल्टर होम में क्वारंटीन दूसरे राज्यों के लोगों को उनके घरों में भेजने की अभियान की शुरुआत कर दी है। यह शुरुआत शुक्रवार से शुरू हुई। यूपी भेजने के लिए गढ़वाल में फंसे लोगों के लिए हरिद्वार और कुमाऊं में फंसे लोगों के लिए बरेली को ट्रांजिट केंद्र बनाया गया है।

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इसी क्रम में आज शनिवार को देहरादून स्थित जैन धर्मशाला और महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज से मजदूरों को रोडवेज की बसों से रवाना किया गया। इससे पहले इन बसों को सैनिटाइज किया गया। मजदूरों की स्क्रीनिंग की गई। सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखकर इन्हें बस में बैठाया गया। स्पोर्ट्स कॉलेज से करीब 500 मजदूरों का आज रवाना किया जाना है। 
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वहीं हल्द्वानी स्टेडियम में बने शेल्टर होम से 124 लोगों को रवाना किया गया है। टनकपुर से पिथौरागढ़ और चम्पावत जिले के राहत शिविरों से उत्तर प्रदेश के 441 लोगो को रोडवेज बसों से भेजा गया है। चम्पावत जिले में 361 और पिथौरागढ़ जिले के राहत शिविरों में 80 लोग ठहराए गए थे।
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लॉकडाउन में फंसे यूपी के लोगों की हरिद्वार से घर वापसी शुरू हो गई है। राहत कैंपों से लोगों को ले जाने के लिए बसें पहुंच गई हैं। 1063 प्रवासी श्रमिक आज अपने घर लौटेंगे।

थाना भगवानपुर की काली नदी चौकी से उत्तरप्रदेश पुलिस को सौपने की तैयारी की जा रही है। जनपद सहारनपुर से 43 बस रोडवेज की आई हैं। डॉक्टरों की टीम द्वारा स्कीनिंग करने बाद जनपद सहारनपुर प्रशासन को सौप दिए जाएंगे। हरिद्वार से उत्तराखंड के दूसरे जिलों में रहने वाले लोग भी आज बसों से भेजे गए। भगवानपुर बॉर्डर से श्रमिकों को 40 बसों के जरिए यूपी में उनके घरों के लिए रवाना किया गया है।

रूट प्लान तैयार

उत्तराखंड रोडवेज की बसों से लोगों को हरिद्वार और बरेली ले जाया जा रहा है। उत्तराखंड के प्रवासियों को लेकर लेकर आ रही यूपी की बसों में उन्हेंं उनके गंतव्य स्थलों को भेज दिया जाएगा। इसके लिए रूट प्लान तैयार किया गया है।

इसी तरह राजस्थान की बसें उत्तराखंड के प्रवासियों को लेकर हरिद्वार पहुुंचेंगी। यहां राज्य में ठहरे राजस्थान के लोगों को इन्हीं बसों में भेजा जाएगा। जहां से उत्तराखंड रोडवेज की बसें यहां के लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएंगी।

गुरुवार को राहत केंद्रों में रह रहे नेपाली नागरिकों को स्वदेश भेजे जाने के बाद शुक्रवार को उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मजदूरों को भी उनके प्रदेशों को भेज दिया गया। राहत केंद्रों में रह रहे 83 मजदूरों को रोडवेज की चार बसों से रवाना किया गया। जिसमें 82 मजदूरों को टनकपुर और एक राजस्थान निवासी मजदूर को हल्द्वानी भेजा गया।

घर जाने को तैयार 30 हजार मजदूर

एक माह से भी ज्यादा समय से देहरादून जिले में लॉकडाउन में फंसे 30 हजार लोग अपने-अपने घर जाने को तैयार बैठे हैं। थाना और पुलिस चौकी प्रभारियों ने मजदूरों से बात कर इनकी सूची मुख्यालय को भेज दी है। एसपी क्राइम लोकजीत सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा 15243 श्रमिक उत्तरप्रदेश के हैं। 13 हजार मजदूर बिहार के रहने वाले हैं।

शनिवार को पहले चरण में उत्तरप्रदेश और राजस्थान के मजदूरों को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की बसों में भेजने का काम शुरू किया गया । एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि अधिकतर मजदूर दून में काम करने के पक्ष में हैं। उनका कहना है काम न होने के कारण अब पैसा उनके पास नहीं हैं। यदि काम मिलता तो कुछ कमाकर घर जाते। लेकिन, लॉकडाउन के कारण तस्वीर साफ नहीं हैं। ऐसे में उनके सामने घर उनकी मजबूरी है।

श्रमिकों की संख्या

उत्तर प्रदेश -15243, बिहार-13048, झारखंड-435, पश्चिम बंगाल -220, मध्य प्रदेश-193, छत्तीसगढ़-172, जम्मू कश्मीर-242, हरियाणा-94, राजस्थान-86, हिमाचल प्रदेश- 78, पंजाब-47, दिल्ली-54, महाराष्ट्र-28, असम-21, चंडीगढ़-14, उड़ीसा-05, गुजरात-04, कर्नाटक-02, तेलांगना-01, नेपाल-459, उत्तराखंड-127।

कुशल मजदूर लाने के लिए केंद्र सरकार को भेजा पत्र

निर्माण कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बाहरी राज्यों से कुशल मजदूरों को लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र भेजकर कुशल मजदूरों को राज्य में लाने की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया गया है।

शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान गडकरी से कुशल श्रमिकों को दूसरे राज्यों से लाए जाने की अनुमति मांगी थी। इस संबंध में गडकरी ने लिखित प्रस्ताव देने को कहा था, ये प्रस्ताव भेज दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि कुशल श्रमिकों के अभाव में राज्य सरकार की चारधाम आलवेदर रोड, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना और महाकुंभ में चल रहे सड़कों और पुलों के निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में दिक्कत हो रही है। परियोजनाओं की कार्यदायी एजेंसी बाहरी राज्यों के कुशल श्रमिकों पर ही निर्भर है। यही वजह है कि कौशिक ने गडकरी के समक्ष यह मसला उठाया था।

सीमेंट, सरिया लाने की अनुमति मांगी

केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट, सरिया व स्टील बाहरी राज्यों से लाने की अनुमति भी मांगी गई है। राज्य में इनका उत्पादन न के बराबर है। पूरी तरह से दूसरे राज्यों पर निर्भरता है।

कुछ दिन पूर्व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर कुछ मसलों को लेकर चर्चा हुई थी। मंत्रालय को पत्र भेज दिया गया है। उसमें उन सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिन पर बैठक में चर्चा हुई थी।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि

लॉकडाउन में फंसे लोगों का पहला जत्था पहुंचा पौड़ी

लॉकडाउन में फंसे हुए लोगों को लेकर पहला जत्था पौड़ी पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने ग्राम प्रधानों व निकाय प्रशासन को एहतियात बरतते हुए सभी लोगों को होम क्वारंटीन किए जाने के निर्देश दिए हैं।

शनिवार को लॉकडाउन के चलते देहरादून जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए पौड़ी जनपद के लोगों का पहला जत्था मुख्यालय पहुंचा। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि 12 बसों में कुल 426 लोग जनपद पौड़ी पहुंचे हैं। इनमें 278 पौड़ी और 148 कोटद्वार पहुंचे।

उन्होंने कहा कि जनपद पहुंचे लोगों की स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें अपने-अपने घरों को रवाना किया जाएगा। पौड़ी जनपद के लोगों को संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। उधर, कोटद्वार पहुंचे 148 लोगों को जांच के बाद होम क्वारंटीन भेजा जाएगा। 

रुद्रप्रयाग के 4000 प्रवासियों ने किया घर आने के लिए आवेदन

लॉकडाउन के कारण अन्य राज्यों में फंसे प्रवासियों में 4000 ने उन्हें अपने गांव भेजने के लिए राज्य सरकार को आवेदन किया है। उत्तर प्रदेश से  रविवार से वापसी शुरू होगी। आने वाले दिनों में यह संख्या काफी संख्या में बढ़ने की संभावना है। वहीं, जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सामने इन लोगों को गांवों में सफल तरीके से होम व इंस्टीट्यूशन क्वारंटीन करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

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