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उत्तराखंड में बड़े भूकंप की चेतावनी दे चुके वैज्ञानिक, अब बचाव के लिए शिवालिक पहाड़ी रवाना हुई टीम

Sun, 09 Dec 2018 09:40 AM IST
जीवन कुमार, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
जीवन कुमार, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल) Updated Sun, 09 Dec 2018 09:40 AM IST
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uttarakhand is in danger of big earthquake scientists went shivalik hills for research
भूकंप - फोटो : self

जमीन के अंदर स्थित टेक्टोनिक प्लेट्स का मूवमेंट भूकंप का एक बड़ा कारण है। मूवमेंट की सही जानकारी हो जाए तो भूकंप से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

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इस मूवमेंट को जानने के लिए हेलीकॉप्टर में क्षणिक विद्युत चुंबकीय तकनीक को लगाकर रामनगर से लेकर कालाढूंगी तक जांच की जा रही है। दस दिसंबर तक प्रस्तावित टेस्टिंग में सफलता मिलने पर यहां भूगर्भ वैज्ञानिकों का डेरा लगेगा।     
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भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक जोन-5 में उत्तराखंड भी शामिल है।

पिछले तीन-चार सालों से वैज्ञानिक उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आने की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में सरकार ने राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) के वैज्ञानिकों तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) हैदराबाद के वैज्ञानिकों की टीम शिवालिक पहाड़ी की तलहटी क्षेत्र में सर्वे कर रही है।

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ऐसे मापे जाएंगे भूकंप के खतरे

एनजीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अजय मांगलिक ने बताया कि क्षणिक विद्युत चुंबकीय, चुंबकीय, गामा किरण स्पेक्ट्रम मैट्रिक सिस्टम से लैस कम ऊंचाई वाले हेलीबोर्न भूगर्भीय अन्वेषण केक क्षेत्र में देश के अग्रणी संगठन है। हेलिबोर्न क्षणिक विद्युत चुंबकीय तकनीक विश्व स्तर पर खनिज, भूजल सर्वे, मेगा भूतकनीकी परियोजनाओं के लिए विशिष्ट तकनीक है।

इसमें हेलीकॉप्टर के नीचे लटकने वाले बड़े लूप में विद्युत चुंबकीय प्रवाह उत्पन्न होता है। इस प्रवाह के कारण जमीन के प्रेरण प्रभाव को रिसीवर से मापा जाता है। यह तकनीक भूकंप से उत्पन्न खतरों के आकलन, पहाड़ी इलाके में प्राकृतिक संसाधनों की खोज के लिए इस्तेमाल की जाती है।

500 मीटर गहराई तक जांच करने में सक्षम
एनजीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अजय मांगलिक ने बताया कि यह तकनीक लगभग 500 मीटर गहराई तक की धरातलीय संरचना को दूर से इमेज करने में सक्षम है। संस्थान ने देश के विभिन्न हिस्सों में खनिज, भूजल अन्वेषण के लिए करीब 1.25 लाख लाइन किमी को कवर करने वाले सर्वेक्षण किए हैं।

कॉर्बेट ने दिया भूगर्भ वैज्ञानिकों को नोटिस

कॉर्बेट लैंडस्केप के जंगल में हेलीकॉप्टर से सर्वे कर रहे एनजीआरआई के वैज्ञानिकों को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) प्रशासन ने नोटिस दिया। कहा कि साइलेंट जोन की वजह से कॉर्बेट क्षेत्र में हेलीकॉप्टर को न उड़ाया जाए। कॉर्बेट नेशनल पार्क के वार्डन शिवराज चंद ने बताया कि हेलीकॉप्टर डिग्री कॉलेज परिसर से उड़ान भर रहा है।

उससे कुछ ही दूरी पर सीटीआर की सीमा शुरू होती है, जोकि साइलेंट जोन है। ऐसे में वन्यजीवों को परेशानी हो सकती है। इसलिए हेलीकॉप्टर को यहां से न उड़ाया जाए। एनजीआरआई ने कॉर्बेट पार्क को नोटिस का जवाब देते हुए कहा कि वह कॉर्बेट क्षेत्र में उड़ान नहीं भर रहे हैं। उनका हेलीकॉप्टर रामनगर से कालाढूंगी तक जा रहा है। इसकी विधिवत अनुमति ली गई है।

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