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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ कॉलेज गुपचुप शिफ्ट करने पर सरकार को लगाई फटकार

Fri, 29 Mar 2019 11:39 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 29 Mar 2019 11:39 PM IST
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Uttarakhand High Court Strict on government for shifting National Law College
कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

किच्छा के प्राग फार्म में प्रस्तावित नेशनल लॉ कॉलेज को गुपचुप तरीके से कोर्ट को बताए बिना देहरादून स्थित रानीपोखरी शिफ्ट करने पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कहा कि यह कोर्ट की अवमानना है और इसी के साथ सरकार की ओर से अतिरिक्त समय की मांग के प्रार्थनापत्र को भी खंड पीठ ने खारिज कर दिया।
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प्रदेश सरकार ने तीन मार्च को नेशनल लॉ कालेज का रानीपोखरी में शिलान्यास किया था लेकिन उस समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह कॉलेज ऊधमसिंह नगर से शिफ्ट किया जा रहा है।   
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शुक्रवार को हुई सुनवाई में खंडपीठ ने कहा कि बना बताए नेशनल लॉ कालेज को शिफ्ट किया जाना कोर्ट की अवमानना है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कॉलेज के कुलाधिपति हैं। कोर्ट पहले ही कह चुका है कि नेशनल लॉ कालेज किच्छा के प्राग फार्म में स्थापित किया जाए और सितंबर 2018 तक यहां कक्षाएं भी शुरू कर दी कर दी जाएं। जब तक भवन बनकर तैयार नहीं हो जाता तब तक सरकारी या निजी भवनों में शिक्षण कार्य प्रारंभ किया जाए।

खंडपीठ ने कहा कि जब प्राग फार्म में जगह चयनित हो चुकी थी तो रानीपोखरी में ले जाने की क्या जरूरत थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने अभी तक पूर्व में पारित किसी भी आदेश का पालन नहीं किया है। शुक्रवार को हुई इस मामले की सुनवाई में सरकार की ओर से आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय के प्रार्थनापत्र को भी नाराज कोर्ट ने निरस्त कर दिया। 

पूर्व में वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा की पीठ ने दिए थे आदेश
पूर्व में वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा कि खंडपीठ ने सरकार को ऊधमसिह नगर के  किच्छामें प्राग फार्म में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलने का आदेश दिया था। पीठ ने यह भी कहा था कि 16 अगस्त 2018 से कक्षाएं प्रारंभ कराई जाएं और राज्य सरकार विश्वविद्यालय बनाने के लिए 25 एकड़ भूमि हस्तांतरित करे। छह माह बीत जाने के बाद भी भूमि हस्तांतरित नहीं हुई। भोपाल भाकुनी ने अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि विश्वविद्यालय बनाने के बजाय चयनित भूमि को बेचने का प्रयास सरकार कर रही है।

पहले भी अवमानना का नोटिस जारी हुआ था
याची भोपाल भाकुनी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी मामले में पूर्व में एकलपीठ ने अवमानना के तहत प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, प्रमुख सचिव न्याय, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को पक्षकार बनाते हुए छह मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के दिए थे।

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