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उत्तराखंड में बड़े आयोजनों की अनुमति को बनाएं कमेटी: हाईकोर्ट
Mon, 27 Jul 2020 11:12 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 27 Jul 2020 11:12 PM IST
सार
- औली में हुई गुप्ता बंधुओं की दो सौ करोड़ की शाही शादी का मामला
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट में आज चमोली जिले के प्रसिद्ध हिमक्रीड़ा केंद्र औली बुग्याल में हुई गुप्ता बंधुओं की दो सौ करोड़ की शाही शादी के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने कहा है कि ऐसे आयोजनों की अनुमति पर विचार करने के संबंध में पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाए जो कि पर्यावरण को नुकसान पर नियंत्रण तथा गतिविधियों पर नजर रखेगी।
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न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। मामले के अनुसार अधिवक्ता रक्षित जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 18 से 20 जून 2019 तक औली में हुई शाही शादी के लिए औली बुग्याल में सरकार की ओर से विवाह की अनुमति दी गई। ऐसे में पर्यावरण को हानि पहुंचना तय है। याचिका में सरकार पर कानून विरुद्ध अनुमति देने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी। मामले में कोर्ट ने पर्यावरण के नुकसान की भरपाई को लेकर गुप्ता परिवार को तीन करोड़ जमा करने का आदेश दिया था।
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कोर्ट में सुनवाई के दौरान औली में गंदगी को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई थी। जिसके बाद सरकार ने अपने बचाव में कहा कि औली बुग्याल नहीं है। जिस पर कोर्ट ने इस संबंध में वाडिया इंस्टीट्यूट, जीबी पंत, हिमालयन इंस्टीट्यूट, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा एनआईएम नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेन संस्थानों से जवाब मांगा था। जिसमें पूछा था कि औली बुग्याल है या नहीं। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि टूरिज्म व पर्यावरण के बीच में तालमेल रखा जाए।
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औली में क्षमता के अनुसार ही पर्यटकों को भेजा जाए। सरकार यहां विंटर खेलों के साथ एडवेंचर टूरिज्म को ही बढ़ावा दे। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकार की मंशा भले ही सही हो लेकिन सरकार को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। बुग्याल वाले मामले में कोर्ट ने आदेश नहीं दिया है, लेकिन कहा है कि अगर औली बुग्याल नहीं भी है तो जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।