उत्तराखंड: अजय भट्ट के दावों के विपरीत बीसी खंडूड़ी का लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौजूदा सांसदों को ही चुनावी समर में उतारने के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के हालिया दावे के विपरीत मेजर जनरल (से.नि.) बीसी खंडूड़ी इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। खंडूड़ी का कहना है कि वो छह महीने पहले ही केंद्रीय नेतृत्व को चुनाव न लड़ने का अपना फैसला बता चुके हैं।
उम्र दराज होने और खराब स्वास्थ्य के कारण खंडूड़ी सक्रिय राजनीति से कुछ सालों मेें बाहर होते चले गए। पिछले दो वर्षों में सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी बेहद कम उपस्थिति रही। लंबे समय से उनका वर्ष 2019 चुनाव नहीं लड़ने की चर्चा चल रही थी, आखिर खंडूड़ी ने सोमवार को अमर उजाला से पहली बार साफ-साफ कहा कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे। जनरल खंडूड़ी ने सेना से रिटायर होने के बाद वर्ष 1991 में पहली बार भाजपा के चुनाव चिन्ह पर पौड़ी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा।
सतपाल महाराज से हार का सामना करना पड़ा था
पहले चुनाव में जीत के बाद अगले वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के सतपाल महाराज से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री बने। वर्ष 2000 में केंद्रीय राज्य मंत्री सड़क परिवहन एवं राजमार्ग का स्वतंत्र प्रभार दिया। वर्ष 2003 में उनको प्रमोट कर केंद्रीय मंत्री बनाया गया। इस बीच उत्तराखंड राज्य का गठन हो चुका था, लेकिन खंडूड़ी केंद्रीय राजनीति में बने रहे।
वर्ष 2007 में प्रदेश में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला तो उन्हें पार्टी ने सांसद होते हुए मुख्यमंत्री घोषित किया। खंडूड़ी को वर्ष 2009 में मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया, लेकिन दो वर्ष के बाद 2011 में पार्टी ने दोबारा उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। उनकी अगुवाई में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव लड़े गए, लेकिन खंडूड़ी खुद विधानसभा सीट कोटद्वार से हार गए। पार्टी मामूली अंतर से बहुमत के आंकड़े से चूक गई। वर्ष 2014 में उन्हें एक बार फिर पौड़ी संसदीय सीट से टिकट दिया गया और भारी मतों से उनकी जीत हुई थी।
मैंने पार्टी हाईकमान को 2019 में लोस चुनाव न लड़ने के बारे में छह माह पहले ही बता दिया है। इस सीट पर किसी नए व्यक्ति को मौका देना चाहिए। अब यह पार्टी नेतृत्व को तय करना है कि किसे चुनाव लड़ाया जाए।
- मेजर जनरल (से.नि.) बीसी खंडूड़ी, सांसद पौड़ी संसदीय सीट