उत्तराखंड: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव का चेहरा घोषित करने की बात पर कांग्रेस की सियासत में भूचाल
- हरीश रावत ने सामूहिक नेतृत्व की बात को नकारा, कांग्रेस में अंदरखाने भूचाल
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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासिचव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सोमवार को चुनाव का चेहरा घोषित करने की मांग कर कांग्रेस की सियासत में भूचाल ले आए। रावत ने पहले सुबह और दिन भर की प्रतिक्रियाओं के बाद देर शाम ट्वीट किया। इसी के साथ रावत सात दिन के पहाड़ के दौरे पर भी निकल गए।
गढ़वाल दौरे पर निकलने से पहले रावत ने प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को इंगित ट्वीट में कहा कि पार्टी को बिना लाभ लपेट के 2022 के चुनावी रण का सेनापति घोषित कर देना चाहिए। पार्टी को यह भी घोषित कर देना चाहिए कि कांग्रेस के विजयी होने की स्थिति में वही व्यक्ति प्रदेश का मुख्यमंत्री भी होगा।
रावत ने लिखा कि हम चुनाव में अस्पष्ट स्थिति में जाएंगे तो पार्टी को नुकसान होगा। रावत ने लगे हाथों अपनी स्थिति भी स्पष्ट की और लिखा -‘मुझको लेकर पार्टी को कोई असमंजस नहीं होना चाहिए। पार्टी जिसे भी सेनापति घोषित करेगी, मैं उसके पीछे खड़ा रहूंगा’।
पूर्व मुख्यमंत्री के इस ट्वीट से कांग्रेस में खासी प्रतिक्रिया हुई। गढ़वाल दौरे के तहत श्रीनगर पहुंचे हरीश रावत ने देर शाम फिर ट्वीट किया और लिखा कि चुनाव के बाद नेता तय करने की परंपरा रही है पर ऐसा हर राज्य में नहीं हुआ है। पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, केरल, दिल्ली सहित अन्य कई राज्यों में पार्टी ने स्पष्ट चेहरा घोषित किया और चुनाव लड़ा।
अधिकतर राज्यों में परिणाम बेहतर रहा। रावत के मुताबिक परंपरा हमारी बनाई हुई है और स्थितियों को देखकर बदलाव लाया जा सकता है। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा ने चुनाव को एक राजनीतिक घटना के स्थान पर एक राजनीतिक युद्ध में बदल दिया है इसलिए कमांड लाइन बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए।
दो दिन पहले ही प्रदेश प्रभारी ने दिया था सामूहिक नेतृत्व का संदेश
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यह प्रतिक्रिया पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की प्रतिक्रिया के बाद आया। दून पहुंचे प्रदेश प्रभारी ने पूछे जाने पर साफ कहा था कि पार्टी में चुनाव पूर्व चेहरा घोषित करने की परंपरा नहीं है। चुनाव सामुहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
कांग्रेस की सियासत में अंदरखाने तूूफान
पूर्व मुख्यमंत्री के ट्वीट के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत भी गरमा गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह गढ़वाल दौरे पर हैं और उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पूछे जाने पर कहा कि प्रदेश प्रभारी इस मामले को पूरी तरह से स्पष्ट कर चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने भी खुलकर कुछ बोलना मुनासिब नहीं समझा।
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं। राहुल गांधी भी पार्टी मामलों को देखते हैं। उनकी ओर से जो भी निर्देेश होगा माना जाएगा। इस मामले में हमारा कुछ कहना ठीक नहीं है।
-इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सर्वमान्य नेता हैं। वे कुछ कह रहे हैं तो सोच समझकर ही कह रहे होंगे। उनकी बात को तवज्जो दी जानी चाहिए।
करन माहरा, उप नेता, कांग्रेस विधायक दल
हरीश रावत हमारे वरिष्ठतम नेता है। उनका आशीर्वाद कांग्रेस को हमेशा चाहिए। प्रदेश प्रभारी राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधि हैं। दो दिन पहले ही वे साफ कह चुके है कि सामूहिक नेतृत्व मेें चुनाव लड़ा जाएगा। पार्टी के कार्यकर्ताओं की भावना है कि कांग्रेस सत्ता में आए। चुनाव के बाद मुख्यमंत्री घोषित किया जाएगा।
सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष उत्तराखंड
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदेश के स्थापित नेता हैं। उनकी मंशा यही है कि प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में वापसी करे। खुद कांग्रेस कह रही है कि हरीश रावत की चुनावी रणनीति स्वीकार की जाएगी। हरीश रावत अब चुनाव की रणनीति की बात ही तो कह रहे हैं।
-सुरेंद्र अग्रवाल, मुख्य प्रवक्ता, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत