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Uttarakhand Election 2022: भाजपा में 50 नामों पर सहमति, आज केंद्रीय संगठन की बैठक में पैनल पर होगा मंथन

Sun, 16 Jan 2022 02:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 16 Jan 2022 02:05 PM IST
सार

रविवार को नई दिल्ली में बैठक होगी, जिसमें उत्तराखंड से नामों के पैनल पर विचार होगा। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे।

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uttarakhand election 2022: BJP agrees on 50 names, central organization meeting on Sunday
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा में करीब 50 नामों पर सहमति बन गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के मुताबिक, सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए नामों के पैनल तैयार कर लिए गए हैं। ज्यादातर सीटों पर दो व तीन नाम हैं। कुछेक सीटों पर एक-एक नाम भी है। 

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उत्तराखंड से नामों के पैनल पर विचार होगा
रविवार को नई दिल्ली में बैठक होगी, जिसमें उत्तराखंड से नामों के पैनल पर विचार होगा। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे। प्रदेश से प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार भी शिरकत करेंगे। 
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शनिवार को प्रदेश पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में कोर ग्रुप ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को नामों पर सहमति बनाने के लिए अधिकृत किए। इसके बाद हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में नामों के पैनल तैयार किए गए। 
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खटीमा से चुनाव लड़ेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया कर्मियों को यह जानकारी दी। हालांकि धामी पूर्व में भी साफ कर चुके हैं कि उनका पहला और आखिरी प्यार खटीमा विधानसभा सीट ही है। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का भी हरिद्वार शहर सीट से टिकट तय है। भाजपा में करीब 20 विधानसभा सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है। प्रदेश चुनाव समिति ने इस सीटों पर नामों का पैनल तो बना लिया है और लेकिन उस पर सहमति और निर्णय केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ा है।

कोई देहरादून पहुंचा तो कोई फोन पर ले रहा था टिकट का फीडबैक 

भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में क्या चल रहा है, यह जानने के लिए रुड़की के कई विधायकों ने जहां शनिवार को दिनभर देहरादून में डेरा डाले रखा तो वहीं कुछ विधायक और दोवदार फोन पर फीडबैक हासिल करते रहे। दावेदारों में सबसे ज्यादा यह जानने की बेचैनी थी कि तीन लोगों की लिस्ट में उनका नाम किस नंबर पर है।

वैसे तो भाजपा प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगेगी, लेकिन माना जा रहा है कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में हर सीट पर जो तीन नाम भेजे जाएंगे, उनमें सबसे ऊपर वाले नाम को ही लगभग हरी झंडी मिल जाएगी। इसी के चलते शनिवार को देहरादून में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक को लेकर विधायक और दावेदार खासे गंभीर दिखे।

क्षेत्र के अधिकांश विधायक तो देहरादून में ही डेरा जमाए रहे जबकि कई विधायक और दावेदार दिनभर देहरादून से फीडबैक हासिल करने के लिए फोन घुमाते रहे। सबसे ज्यादा दिलचस्पी उन सीटों के बारे में जानने के लिए रही, जिन सीटों पर टिकट कटने की कयासबाजी लगाई जा रही है। रुड़की और आसपास की चार विधानसभा सीटों पर टिकट को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति है।

टिकटों के एलान के बाद भाजपा को बगावत का अंदेशा
विधानसभा चुनाव में टिकटों के एलान के बाद भाजपा को कुछ सीटों पर बगावत का अंदेशा है। बगावत से होने वाले नुकसान को कम से कम करने के लिए पार्टी ने डेमेज कंट्रोल की रणनीति बना ली है। पार्टी के सांसदों को डेमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी दी जा रही है। लोकसभा क्षेत्रों में सांसदों की अध्यक्षता में समिति बनेगी जिसमें वरिष्ठ नेताओं को रखा जाएगा।

शनिवार को चुनाव समिति की बैठक के बाद पार्टी ने सभी 70 विधानसभा सीटों पर नामों के पैनल तैयार कर लिए हैं, जिन्हें केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। सोमवार को केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में उत्तराखंड से भेजे गए पैनलों पर विचार के बाद प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि कुछ विधानसभा सीटों पर संगठन को बगावत और असंतोष का अंदेशा है। इसलिए पार्टी ने इस खतरे से निपटने के लिए पहले से ही रणनीति बनाई है।

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, कोर ग्रुप की बैठक में इस मसले पर चर्चा हुई। टिकट कटने से नाराज होने वाले दावेदारों का मान-मनौव्वल करने के अभियान पर पार्टी वरिष्ठ नेताओं को झोंकेगी। यह जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के सांसद को दी जाएगी। उनकी अध्यक्षता में डेमेज कंट्रोल कमेटी बनेगी जिसमें संसदीय क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को शामिल कराया जाएगा। चुनाव से पूर्व असंतोष पर अधिकतम काबू पाने की पार्टी की पुरजोर कोशिश रहेगी।

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