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उत्तराखंडः इस संवेदनशील क्षेत्र में पांच साल में हुई 104 सड़क दुर्घटनाएं और 84 मौत

Fri, 17 Jan 2020 02:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजेश भट्ट, अमर उजाला, देवप्रयाग
राजेश भट्ट, अमर उजाला, देवप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 17 Jan 2020 02:17 PM IST
सार

  • कौड़ियाला से बागवान तक संवेदनशील क्षेत्र
  • साकनीधार, तोताघाटी, तीनधारा और मूल्यागांव डेंजर जोन

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Uttarakhand: 104 road accidents and 84 deaths in five years in this sensitive area
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कौड़ियाला से बागवान तक का क्षेत्र दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। यहां सबसे अधिक मुश्किल वाहनों के खाई में गिरने के बाद घायलों को रेस्क्यू करने की होती है। तोताघाटी, साकनीधार, तीनधारा और मूल्यागांव क्षेत्र में चार डेंजर जोन सबसे खतरनाक बने हुए हैं। पिछले पांच वर्षों में यहां अब तक 104 वाहन खाई में गिर चुके हैं। इनमें 84 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग 140 लोग घायल हुए हैं। 

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बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कौड़ियाला से बागवान तक लगभग 45 किलोमीटर का पैच काफी संवेदनशील है। हालांकि ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत राजमार्ग कई स्थानों पर काफी चौड़ा हो चुका है, लेकिन दुर्घटनाओं का सिलसिला रुक नहीं रहा है।
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पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो तोताघाटी में 36  वाहन दुर्घटनाओं में 17, सकनीधार में 25 दुर्घटनाओं  में 12, तीनधारा में 21 हादसों में 15 और मूल्यागांव में 13 दुर्घटनाओं में 29 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2019 में सात दुर्घटनाओं में सात लोगों की मौत और 17 घायल हुए थे, जबकि बृहस्पतिवार को साकनीधार में एक कार के खाई में गिरने से छह लोगों की मौत हुई है।

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संकरी सड़क, ओवर स्पीड और नशाखोरी है वजह

सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार है। कम उम्र के युवा एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में रहते हैं। वहीं टैक्सी व बस चालक सवारियों के लालच में वाहन दौड़ाते हैं। तोताघाटी ऐसा स्थान है, जहां संकरी सड़क, अंधे मोड़ और तीव्र ढलान दुर्घटना का कारण बनते हैं।

इसके अलावा सकनीधार ऐसा क्षेत्र हैं, जहां बारिश होने या ठंड बढ़ने पर घना कोहरा छा जाता है, जिसके चलते कई बार बार वाहन चालक मोड़ या खाई का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं। नींद और शराबखोरी भी दुर्घटना की वजह है। पूर्व में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर शराब की दुकानें नहीं थी। अब यहां हर 25-30 किलोमीटर पर शराब की दुकानें खुल गई है। अकसर वाहन चालक शराब का सेवन कर सबकी जान खतरे में डाल देते हैं। 

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