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ऑपरेशन के इंतजार में तीन हजार मरीज कोहो पा रहे हैं ऑपरेशन माई
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देहरादून। कोविड-19 संक्रमण के चलते ऑपरेशन के लिए देहरादून जिले में ही लगभग तीन हजार से अधिक मरीज इंतजार कर रहे हैं। यह सिर्फ वह आंकड़ा है जो डॉक्टरों से कॉल कर अपनी समस्या बताते हैं। लॉकडॉउन के दौरान निजी अस्पतालों में भी सामान्य तौर पर ऑपरेशन न होने की वजह से भी यह वेटिंग बढ़ी है।
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से समर्पित किए जाने के दौरान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामान्य मरीजों के ऑपरेशन भी बंद कर दिए गए थे। डॉक्टर फोन पर ही मरीजोें को ऑनलाइन परामर्श दे रहे थे। इसमें पता लगा कि उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। कोरोना के पीक आवर में पेट की पथरी, पित्त की थैली की पथरी, बच्चेदानी, हड्डी के जनरल ऑपरेशन, मोतियाबिंद, नाक-कान-गला और पेट से संबंधित अन्य ऑपरेशन जिन्हें रोका जा सकता उन्हें तब दवा देकर बाद में ऑपरेशन करने की सलाह दी जा रही थी। जिन मरीजों के ऑपरेशन जरूरी थे उनमें से कुछ ने निजी अस्पतालों में भी बाद में ऑपरेशन कराए। कुछ मरीजों ने निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत भी ऑपरेशन कराए। ज्यादातर निजी अस्पतालों में भी सामान्य ऑपरेशन तब बंद होने की वजह से सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार दून अस्पताल में ऑपरेशन के लिए वेटिंग बढ़ती जा रही है। दून अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अभय कुमार ने बताया कि कोरोना काल से पहले अस्पताल में हर माह औसतन 300 मरीजों के ऑपरेशन होते थे। अभी लगभग तीन हजार से अधिक मरीजों के ऑपरेशन वेटिंग में हैं। उधर, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि ऑपरेशन शुरू किए जाने को लेकर शासन और निदेशालय का प्रस्ताव भेजा गया है।
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कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह से समर्पित किए जाने के दौरान राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामान्य मरीजों के ऑपरेशन भी बंद कर दिए गए थे। डॉक्टर फोन पर ही मरीजोें को ऑनलाइन परामर्श दे रहे थे। इसमें पता लगा कि उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। कोरोना के पीक आवर में पेट की पथरी, पित्त की थैली की पथरी, बच्चेदानी, हड्डी के जनरल ऑपरेशन, मोतियाबिंद, नाक-कान-गला और पेट से संबंधित अन्य ऑपरेशन जिन्हें रोका जा सकता उन्हें तब दवा देकर बाद में ऑपरेशन करने की सलाह दी जा रही थी। जिन मरीजों के ऑपरेशन जरूरी थे उनमें से कुछ ने निजी अस्पतालों में भी बाद में ऑपरेशन कराए। कुछ मरीजों ने निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत भी ऑपरेशन कराए। ज्यादातर निजी अस्पतालों में भी सामान्य ऑपरेशन तब बंद होने की वजह से सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार दून अस्पताल में ऑपरेशन के लिए वेटिंग बढ़ती जा रही है। दून अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अभय कुमार ने बताया कि कोरोना काल से पहले अस्पताल में हर माह औसतन 300 मरीजों के ऑपरेशन होते थे। अभी लगभग तीन हजार से अधिक मरीजों के ऑपरेशन वेटिंग में हैं। उधर, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि ऑपरेशन शुरू किए जाने को लेकर शासन और निदेशालय का प्रस्ताव भेजा गया है।
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