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तीन जगद्गुरुओं ने शंकराचार्य के खिलाफ खोला मोर्चा, दे डाली बड़ी चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 24 May 2017 01:16 AM IST
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द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिशिक्त किए गए भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद के समर्थन में आए जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद और सुमेरु पीठ के जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद ने एक मंच पर आकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तीनों ने पहले भूमा निकेतन में बैठक की और इसके बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी स्वरूपानंद पर गंभीर आरोप लगाए। नरेंद्रानंद महाराज ने तो स्वामी स्वरूपानंद से सीधे शास्त्रार्थ की बात भी कही।
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पत्रकारों से वार्ता करते हुए तीनों जगद्गुरुओं ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का यह कहना कि एक ही संत चार पीठों पर भी शंकराचार्य बन सकता है पूरी तरह गलत है। स्वामी नरेंद्रानंद ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने हैदराबाद में एक ईसाई धर्मगुरु से आशीर्वाद भी लिया था। ऐसे में वह संन्यासी कहां रह गए हैं।
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वहीं अच्युतानंद तीर्थ ने शंकराचार्य के रूप में अपने चयन को सही बताते हुए कहा कि स्वामी स्वरूपानंद की ओर से उनके खिलाफ जो मुकदमा दर्ज कराया गया है, वह गलत है। यदि स्वरूपानंद सरस्वती को कोई बात करनी भी थी तो उन्हें बुलाते। अच्युतानंद तीर्थ का कहना था कि द्वारिका पीठ पर कोई शंकराचार्य नहीं था, यह पीठ खाली थी और यह पीठ तीर्थ संप्रदाय की है।
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इसलिए इस पीठ पर उनको विधिवत शंकराचार्य बनाया गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद के दो पीठों पर आसीन होने के कारण श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य ने आपत्ति उठाई थी और मुझे शंकराचार्य बनाने के लिए कहा था। तीनों जगद्गुरुओं ने स्वामी स्वरूपानंद पर हर जगह विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया। कहा कि उन्होंने कभी भी कोर्ट में मुकदमा नहीं किया, मगर स्वामी स्वरूपानंद ने हर जगह मुकदमे किए और हर जगह हार भी जाते हैं।