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क्रत्रिम से हमेशा सर्वश्रेष्ठ रही है मानव बुद्धि : प्रो. अनिल
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Iउत्तरांचल विश्वविद्यालय में किया गया कार्यशाला का आयोजनI
उत्तरांचल विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के चैयरमैन प्रो. अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।
प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने मानव जीवन को सरल बनाया है, लेकिन मानव बुद्धि, क्रत्रिम बुद्धि से हमेशा सर्वश्रेष्ठ होती है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन की ओर से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की न केवल शैक्षिक स्तर में उन्नति हुई है, बल्कि उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता भी आयी है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, अभी तक देश के 10 प्रतिशत काॅलेज एवं 33 प्रतिशत विश्वविद्यालय ही अपने मूल्यांकन एवं प्रत्यायन के लिए नैक के सामने आए।
उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगौली ने नैक की आवश्यकता को शिक्षा के हित में सर्वाधिक श्रेष्ठ कदम बताया। इस मौके पर अध्यक्ष जितेंद्र जोशी, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी, शान्तनु रूज, प्रो. प्रशांत नायर, प्रो. धर्मबुद्धि, अंकिता जोशी, डाॅ. अभिषेक जोशी, प्रो. राजेश बहुगुणा, सुधीर जुगरान, ऋषिदेव नौटियाल मौजूद रहे।
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उत्तरांचल विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के चैयरमैन प्रो. अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की।
प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने मानव जीवन को सरल बनाया है, लेकिन मानव बुद्धि, क्रत्रिम बुद्धि से हमेशा सर्वश्रेष्ठ होती है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन की ओर से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की न केवल शैक्षिक स्तर में उन्नति हुई है, बल्कि उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता भी आयी है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, अभी तक देश के 10 प्रतिशत काॅलेज एवं 33 प्रतिशत विश्वविद्यालय ही अपने मूल्यांकन एवं प्रत्यायन के लिए नैक के सामने आए।
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उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगौली ने नैक की आवश्यकता को शिक्षा के हित में सर्वाधिक श्रेष्ठ कदम बताया। इस मौके पर अध्यक्ष जितेंद्र जोशी, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी, शान्तनु रूज, प्रो. प्रशांत नायर, प्रो. धर्मबुद्धि, अंकिता जोशी, डाॅ. अभिषेक जोशी, प्रो. राजेश बहुगुणा, सुधीर जुगरान, ऋषिदेव नौटियाल मौजूद रहे।
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