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'मर्दानी ताकत' खोने के डर ने बजा दी सरकार के इस कार्यक्रम की बैंड

Thu, 08 Feb 2018 11:07 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 08 Feb 2018 11:07 AM IST
सार

-एक ज‌िला ऐसा जहां कोई नहीं पहुंचा नसबंदी कराने 
‌-ट‌िहरी सबसे फ‌िसड्डी
-ऊधम सिंह नगर में कोई भ्रम नहीं
-हरकत में आया स्वास्थ्य व‌िभाग 

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nasbandi

विस्तार

उत्तराखंड के कई पर्वतीय जनपदों में ज्यादातर पुरुषों में एक भ्रम ने राष्ट्रीय कार्यक्रम के मकसद पर पलीता लगा द‌िया है।
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पुरुषों को लगता है क‌ि यद‌ि वे नसबंदी कराएंगे तो उनमें मर्दानगी ताकत कम हो जाएगी। उनके इस डर ने स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है और अब वह नए स‌िरे से जागरूकता अभ‌ियान चलाने की सोच रहा है। इस साल नसबंदी के जो आंकड़े उसने जुटाएं हैं, वे बेहद हताश करने वाले हैं।

एक ज‌िला ऐसा जहां कोई नहीं पहुंचा नसबंदी कराने 
रिपोर्ट के अनुसार, टिहरी, चंपावत जैसे जिलों में एक से दो व्यक्ति की बमुश्किल नसबंदी हो पा रही है। इन दोनों जिलों में  साल-दर-साल यही स्थिति देखने को मिल रही है। रुद्रप्रयाग जिले में इस वित्तीय वर्ष में एक भी पुरुष ने परिवार नियोजन (नसबंदी) नहीं कराई।
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टिहरी सबसे फिसड्डी

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demo pic
नसबंदी के मामले में सबसे पीछे टिहरी जिला चल रहा है। यहां पर 2014-15 से 2017-18 अक्तूबर तक केवल आठ पुरुषों ने नसबंदी कराई है। इसमें भी करीब दो साल से केवल एक-एक व्यक्ति ने ही नसबंदी कराई। कमोबेश यही हाल कुमाऊं मंडल के चंपावत जिले का है। यहां भी तीन साल में एक-दो व्यक्ति ही नसबंदी कराने आगे आए। 

ऊधम सिंह नगर में कोई भ्रम नहीं
नसबंदी कराने में ऊधम सिंह नगर जिला सबसे आगे रहा है। यहां नसबंदी कराने वाले पुरुष और महिलाओं की संख्या सर्वाधिक रही है।

हरकत में आया स्वास्थ्य व‌िभाग 
स्वास्थ्य महान‌िदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव का कहना है क‌ि पुरुषों में नसबंदी कराने को लेकर कई तरह के भ्रम और डर हैं। इसे दूर करने के लिए हर तरह से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन नसबंदी के मामलों में लगातार कमी आना चिंताजनक है। इस संबंध में जल्द ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर कारणों की पड़ताल कर सुधार की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
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