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उत्तराखंड: राज्य का पहला पिंक वेंडिंग जोन आवंटन के बाद भी बंद, महिला स्ट्रीट वेंडर नहीं खोल पा रहीं दुकानें

Sun, 01 Oct 2023 03:34 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 01 Oct 2023 03:34 PM IST
सार

वेंडिंग जोन में बनीं 98 दुकानें महिला सहायता समूहों व वेंडरों के सुपुर्द कर भी दी गई हैं लेकिन इसकी उपयोगिता वर्तमान में न के बराबर है। हालत यह है कि जिन वेंडरों को रोड से हटाकर स्थायी किया गया वह आज भी अतिक्रमण करके बैठे हैं।

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State first pink vending zone closed even after allocation Dehradun Uttarakhand news in hindi
मीटिंग ( प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्मनगरी में व्यापारियों के लंबे संघर्ष के बाद महिला स्ट्रीट वेंडरों के लिए रोड़ीबेलवाला क्षेत्र में राज्य का पहला पिंक वेंडिंग जोन बनाया गया। महिला वेंडर ने इनका आवंटन भी ले लिया लेकिन असुविधाओं के चलते दुकानें बंद ही रखती हैं। रेहड़ी पटरी खोखा एसोसिएशन का कहना है कि पिंक वेंडिंग जोन की उपयोगिता और सार्थकता सिद्ध करने में नगर निगम प्रशासन विफल रहा।

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निगम ने कुल 100 दुकानें बनाई। शासन की मंशा के अनुरूप यह वेंडिंग जोन संचालित नहीं हो सका। वेंडिंग जोन में बनीं 98 दुकानें महिला सहायता समूहों व वेंडरों के सुपुर्द कर भी दी गई हैं लेकिन इसकी उपयोगिता वर्तमान में न के बराबर है। हालत यह है कि जिन वेंडरों को रोड से हटाकर स्थायी किया गया वह आज भी अतिक्रमण करके बैठे हैं।

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क्या है पिंक वेंडिंग जोन का उद्देश्य
कई दुकानें तो ऐसी हैं जिनके ताले आज तक नहीं खुले। ‘अमर उजाला’ ने वेंडिंग जोन की पड़ताल की तो इसमें हकीकत सामने आया। वेंडिंग जोन की कुछ ही दुकानें खुल सकी हैं। दरअसल, आज भी शहर में कई जगह महिलाएं रेहड़ी-पटरी लगाकर अपनी आजीविका चलाती हैं। पिंक वेंडिंग जोन का उद्देश्य उन्हें स्थायी तौर पर दुकानें आवंटित कर आजीविका में सहयोग करना था।

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बता दें कि जिनके नाम दुकानें आवंटित हुईं वह आज भी घाटों पर ही अपनी दुकान पसारे बैठे हैं। लंबे समय से व्यापारी एसोसिएशन की भी मांग थी कि इन्हें व्यवस्थित जगह दी जाए। सीसीआर भवन से रोड़ीबेलवाला के रास्ते पर दुकानें अलॉट तो कर दी गईं, लेकिन अतिक्रमण हटाने की दिशा में उठाया गया यह कदम भी विफल साबित हो रहा है।

 

क्या कहते हैं स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़े लोग

राज्य सरकार के संरक्षण में नगर निगम प्रशासन की ओर से पिंक वेंडिंग जोन विकसित किया गया। मूलभूत सुविधा जैसे बिजली, पानी शौचालय, सीसीटीवी कैमरे, सौंदर्यीकरण जो कि विकास प्राधिकरण की ओर से किया जाना था वह नहीं हो पाया। इसी कारण लाभार्थी महिलाओं द्वार इसके लिए कई बार आवाज उठाई गई। आज रखरखाव न होने के कारण पिंक वेंडिंग जोन की उपयोगिता सार्थक सिद्ध नहीं हो सकी। इस पर शासन को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। - संजय चोपड़ा, प्रांतीय अध्यक्ष, लघु व्यापार एसोसिएशन

दुकानों में सामान रखकर लाभार्थी आज भी घाटों पर ही व्यापार कर रहे हैं। सभी प्रकार की सुविधाएं वेंडिंग जोन में विकसित की गई हैं। जल्द ही उन लाभार्थियों को चिह्नित करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिन्होंने आवंटन के बाद दुकानें नहीं खोलीं। इसके साथ यह भी प्रयास किया जाएगा कि जो वास्तव में इसके पात्र हैं उन्हें आवंटित किया जाए। कोशिश की जाएगी कि जिन्होंने दुकानें नहीं खोली या इसका दुरुपयोग कर रहे हैं उनका आवंटन निरस्त कर दिया जाए। -दयानंद सरस्वती, मुख्य नगर आयुक्त

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महिला पिंक वेंडिंग जोन के लिए एक लाख 60 हजार रुपये महिलाओं ने किस तरह से दिया यह वही जानती हैं। इसके बावजूद उन्होंने वेंडिंग जोन में असुविधाओं के चलते दुकानें नहीं खोलीं। बीते चार पांच माह पूर्व पांच दुकानें जलकर राख हो गई थीं। सुविधाओं में मुख्य रूप से शौचालय की समस्या है। महिला पिंक जोन फाइबर का बनाया गया, जबकि इसे लोहे से सुंदर बनाया जाना था। शासन की योजना के अनुरूप निर्माण कार्य भी नहीं किया गया। - तोमर, प्रदेश अध्यक्ष, मां भागीरथी रेहड़ी पटरी खोखा एसोसिएशन

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