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देहरादून में जाम का कारण बने सात हजार जुलूस, प्रदर्शन

Sat, 30 Sep 2017 11:51 AM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 30 Sep 2017 11:51 AM IST
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seven thousand protest rally is the reason of dehradun jam
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राजधानी में होने वाले जुलूस, प्रदर्शन, ताला बंदी, चक्का जाम, शोभायात्रा यातायात संचालन में सबसे बड़ा अवरोध है। ट्रैफिक पुलिस की ताजा रिपोर्ट में इनकी संख्या करीब सात हजार के करीब बताई गई है।

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प्रदर्शनकारी और धार्मिक अनुयायी मुख्य मार्गों को ही चुनते हैं। वीआईपी मूवमेंट को जाम का एक कारण बताया गया है। इसके अलावा स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण, संकरे मार्ग और पैदल यात्रियों की सुविधाओं की कमी को भी रिपोर्ट में इंगित किया गया है।
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राजधानी की बेकाबू हुई यातायात व्यवस्था का मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के संज्ञान लिए जाने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने नए सिरे से यातायात में सुधार का प्लान तैयार किया है। डीजीपी के माध्यम से भेजी गई रिपोर्ट में जाम के कारणों को प्रमुखता से उठाया गया है।
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एक-एक समस्या का बखूबी ढंग से उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि राजधानी मुख्यालय होने के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर होने वाले धरना, प्रदर्शन, जुलूस, चक्का जाम, आमरण अनशन, मशाल जुलूस और शोभायात्रा सबसे ज्यादा यातायात प्रभावित करती है। साल 2016 का पूरा आंकड़ा रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। जो वाकई चौंकाने वाला है। यह भी बताया गया है कि इससे कौन-कौन से इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होते है।

2016 के आंकड़े 
धरना प्रदर्शन - 5214   
जुलूस -300  
चक्का जाम -36
आमरण अनशन -177
घेराव -96
तालाबंदी -78
बंद - छह
मशाल जुलूस -27
शोभायात्रा -400   

यह भी कारण
स्कूल समय में यातायात का दबाव बढ़ना
सड़कों पर होने वाले कार्यों की गति धीमी
पैदल यात्रियों की सुविधाओं में कमी
शहर के संकरे मार्ग 
सड़कों पर स्थाई और अस्थाई अतिक्रमण
वीआईपी आगमन

यातायात अवरुद्ध वाले क्षेत्र
गांधी रोड, रेलवे स्टेशन, दून अस्पताल, डालनवाला स्कूल क्षेत्र, सर्वे चौक, राजपुर रोड, दिलाराम से ग्रेट वैल्यू, सुभाष रोड, घंटाघर, आईएसबीटी, जोगीवाला, मोहकमपुर, प्रेमनगर, मसूरी आदि। 

आयोग ने दिए लेन बनाने के आदेश
उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने शहर की यातायात व्यवस्था को गंभीरता से लेकर जुलूस, प्रदर्शन और शोभायात्रा के अलग से लेन बनाने के आदेश दिए थे। बाकायदा ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों से सुझाव मांगे गए थे। घंटाघर को पूरी तरह यात्राओं से मुक्त करने को कहा गया था। उस समय एसपी सिटी प्रदीप राय एस ट्रैफिक थे। कुछ दिन तो काम हुआ, मगर अधिकारियाें के बदलने के बाद उस आदेश को तवज्जों नहीं दी गई है।  


डीजीपी को सौंपी गई रिपोर्ट में शहर की स्थिति, कारणों, सड़काें और जाम वाले स्थलों का पूरा उल्लेख किया गया। निसंदेह जुलूस, प्रदर्शन और शोभायात्रा सबसे ज्यादा यातायात प्रभावित होने का कारण बनती है। शहर के लोगों को जागरूक होने की जरूरत है।
- धीरेंद्र गुंज्याल, पुलिस अधीक्षक यातायात

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