एम्स से डिस्चार्ज होते ही स्वामी गोपालदास ने फिर त्यागा जल, पीएम मोदी को भेजा खून से लिखा खत
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एम्स से निकलते ही संत गोपालदास ने फिर अपनी राह पकड़ ली है। मंगलवार को एसडीएम ने एम्स से रिलीज लेटर लेने के बाद उन्हें हरिद्वार स्थित मातृसदन छोड़ा। वहां पहुंचते ही उन्होंने एलान किया कि गंगा और गंगत्व के संरक्षण के लिए वे बुधवार से जल त्याग करने जा रहे हैं। उन्होंने इस बावत एक खून से लिखा पत्र भी एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है।
पत्र में उन्होंने पीएम मोदी को देश के प्रधान सेवक, चौकीदार, पहरेदार कहकर संबोधित किया है। उन्होंने सवाल किया है कि हम जैसे साधारण लोगों और महात्माओं का जीवन क्या नीति आयोग के बलबूते है।
उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र में लोक की बात सुनी जानी चाहिए। यही प्रजातंत्र की खूबसूरती है। बड़े विश्वास के साथ जनता ने आपको पीएम पद पर बैठाया है। ऐसे में जनमानस के हित की सोचना आपकी जिम्मेदारी है। असल बात यह है कि विकास के नाम पर लोगों का भविष्य चौपट किया जा रहा है।
मातृ सदन में स्वामी सानंद की श्रद्घांजलि सभा 20 को
आप जो भाषणों में कहते हैं उन्हें करनी में तब्दील करने का माद्दा भी होना चाहिए। गंगत्व नष्ट करके जिस तरह प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा जा रहा है वह विनाश का कारण बनेगा। संत ने पीएम मोदी से मांग की है कि हिमालय के पारिस्थितिकीय तंत्र, पर्यावरणीय संतुलन को देखते हुए ऐसी नीति बनाएं।
ऐसा खाका तैयार कवाएं जिससे मानवीय हस्तक्षेप की सीमा तय हो सके। उन्होंने लान किया है कि बुधवार से वह मौनव्रत धारणकर जल त्याग करेंगे। यह अनशन तब तक जारी रहेगा जब कि प्रधानमंत्री की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता। चिट्ठी खून से लिखने के बारे में एसडीएम हर गिरी का कहना है कि संत गोपाल दास ने चिट्ठी पहले से लिख रखा था। लाल रंग था लेकिन कह नहीं सकता कि वो खून से लिखा गया या किसी स्याही से। पत्र भेज दिया गया है।
मातृसदन की ओर से ब्रहृमचारी दयानंद ने बताया है कि 20 अक्तृबर को यहां स्वामी सानंद की श्रद्घांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही गंगा की अविरलता के लिए आंदोलन की रणनीति भी तय होगी। उन्होंने बताया कि इसी दिन स्वामी शिवानंद घोषणा भी करेंगे कि गंगा की निर्मलता के लिए वे कब अनशन पर बैठ रहे हैं।