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Roorkee: संघर्षों से लड़कर रेखा ने लिखी बदलाव की कहानी, सफीपुर स्कूल बना शिक्षा का नया मॉडल

Mon, 02 Mar 2026 11:21 AM IST
Renu Saklani शाहरुख सामानी, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
शाहरुख सामानी, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: Renu Saklani Updated Mon, 02 Mar 2026 11:21 AM IST
सार

सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच शिक्षिका की मेहनत रंग लाई। नवाचार और समर्पण से शिक्षिका रेखा बुडकोटी ने विद्यालय की तस्वीर बदल दी।

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Safipur School became a new model for education Teacher Rekha Budkoti changed school image roorkee
सफीपुर स्कूल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजकीय प्राथमिक विद्यालय सफीपुर में कभी संसाधनों की भारी कमी हुआ करती थी वहीं, आज यही स्कूल शिक्षा के नए मॉडल के रूप में पहचान बना रहा है। इस परिवर्तन के पीछे शिक्षिका रेखा बुडकोटी की अथक मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच सबसे बड़ा कारण बनी है।

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शिक्षिका रेखा ने विद्यालय में स्कूल प्रभारी पद का कार्यभार संभालते ही यह ठान लिया था कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं होगा। शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बच्चों की कम रुचि, अभिभावकों की उदासीनता और संसाधनों की कमी बड़ी बाधा थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके अथक प्रयासों और एनजीओ के सहयोग से अब विद्यालय का स्वरूप ही बदल गया है।

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अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल नहीं भेजते थे

स्कूल में बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, खेल का मैदान और मैदान में खेल उपकरण को लगाया गया। वहीं स्कूल की दीवारों पर संदेशात्मक और पाठ्यक्रम संबंधित चित्र बनाए बए। इससे बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गणित और सामान्य ज्ञान सिखाया गया। वहीं, स्कूल में डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर पढ़ाई को रोचक बनाया गया। अब छात्र न केवल नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं बल्कि पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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पहले जहां कई अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल नहीं भेजते थे, वहीं अब वे खुद बच्चों की पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं। शिक्षिका रेखा की ओर से बच्चों को स्वच्छता, पौधारोपण और नैतिक शिक्षा से भी जोड़ा गया। स्कूल परिसर अब साफ-सुथरा और आकर्षक दिखाई देता है, जो आसपास के विद्यालयों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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