फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Rock bolt technology will stop landslides on Gangotri Highway Uttarakhand News in hindi

Uttarkashi News: गंगोत्री हाईवे पर रॉक बोल्ट तकनीक से रुकेगा भूस्खलन, सिलक्यारा सुरंग में भी काम आ रही

Fri, 06 Dec 2024 02:22 PM IST
रेनू सकलानी अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 06 Dec 2024 02:22 PM IST
सार

गंगोत्री हाईवे पर रतूड़ीसेरा और बंदरकोट के भूस्खलन जोन के उपचार के लिए रॉक बोल्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

विज्ञापन
Rock bolt technology will stop landslides on Gangotri Highway Uttarakhand News in hindi
गंगोत्री हाईवे पर रॉक बोल्ट तकनीक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पहाड़ में भूस्खलन जोन के उपचार में रॉक बोल्ट तकनीक मददगार साबित हो रही है। गंगोत्री हाईवे पर रतूड़ीसेरा और बंदरकोट में सक्रिय भूस्खलन जोनों के उपचार में भी इसी तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पूर्व भी गंगोत्री हाईवे पर लंबे समय तक नासूर बने रहे नालूपानी और चुंगी बड़ेथी भूस्खलन जोन का इसी तकनीक से उपचार किया जा चुका है।

विज्ञापन


विशेषज्ञों की माने में तो भूस्खलन को रोकने में यह तकनीक 90 प्रतिशत तक कारगर है। दरअसल, पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन एक बड़ी समस्या है। खास तौर पर गंगोत्री व यमुनोत्री राजमार्ग पर सक्रिय भूस्खलन जोन वर्षों से चारधाम यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत रहे हैं। लेकिन इन भूस्खलन जोन के उपचार में रॉक बोल्ट तकनीकी मददगार साबित हो रही है।
विज्ञापन


चारधाम सड़क परियोजना के तहत हुए चौड़ीकरण कार्य में भी कई जगह इसी तकनीकी से वर्षों से सक्रिय रहे भूस्खलन जोन का उपचार किया गया है। जहां परिणाम भी अच्छे रहे हैं। इनमें गंगोत्री हाईवे पर चिन्यालीसौड़ के निकट लंबे से तक नासूर रहा नालूपानी और जिला मुख्यालय के निकट चुंगी बड़ेथी शामिल है। हालांकि चुंगी बड़ेथी में खतरे को देखते हुए बाद में सड़क सुरक्षा गैलरी का अलग से निर्माण किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

दोनों भूस्खलन जोन के उपचार के साथ हाईवे का चौड़ीकरण होगा
वहीं, अब गंगोत्री हाईवे पर सक्रिय दो बड़े भूस्खलन जोन रतूड़ीसेरा और बंदरकोट में भी इसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। दोनों भूस्खलन जोन के उपचार के साथ हाईवे का चौड़ीकरण होगा। रतूड़ीसेरा में जहां इस काम पर 19.8 करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, बंदरकोट में 9.3 करोड़ की लागत से यह काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों जगह चल रहे काम को मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सिलक्यारा सुरंग में भी काम आ रही तकनीक

बीते वर्ष सिलक्यारा सुरंग में हुए भूस्खलन के मलबे को हटाने के लिए भी इसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। मलबे को रॉक बोल्ट तकनीक से स्थिर करने के बाद मशीनों से निकासी सुरंगें बनाई जा चुकी है। अभी तक तीन में दो सुरंगें बनाई जा चुकी हैं। बता दें कि भूस्खलन के दौरान सिलक्यारा सुरंग में आया मलबा 65 मीटर दायरे में फैल गया था।

ये भी पढ़ें...रिसते रिश्ते: देवभूमि में इंसानियत शर्मसार...औलाद माता-पिता पर कर रही अत्याचार, बुजुर्गों का दिखा ऐसा हाल

पहाड़ में भूस्खलन की रोकथाम के लिए रॉक बोल्ट तकनीक कारगर है। यह एक ऑस्ट्रेलियन तकनीक है, जिसमें भूस्खलन के लूज मलबे को हटाकर मिट्टी होने पर सॉयल नेलिंग और चट्टान में रॉक बोल्टिंग की जाती है। -विवेक श्रीवास्तव, कमांडर बीआरओ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed