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आदर्श गांव: तीन साल में न सड़क सुधरी, न पलायन थाम सके सांसद 

Fri, 23 Jun 2017 12:37 PM IST
अमरनाथ/प्रवीन कोहली / अमर उजाला, खटीमा
अमरनाथ/प्रवीन कोहली / अमर उजाला, खटीमा Updated Fri, 23 Jun 2017 12:37 PM IST
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी - फोटो : amar ujala

तहसील मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित सरपुड़ा बग्घा 54 गांव को गोद लेने के बाद भी सांसद भगत सिंह कोश्यारी अब तक न तो संपर्क सड़क को दुरुस्त करा सके हैं और न ही ग्रामीणों का पलायन थाम सके हैं।

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सांसद के वादे के मुताबिक ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव गोद लेने से सुरई वन रेंज से होकर जाने वाली सड़क पक्की हो जाएगी और बेटियों की शादियां जल्दी होंगी, लेकिन ग्रामीणों को अब भी जर्जर सड़क और आरक्षित वन नियमों से जूझना पड़ता है। मानसून पूर्व हुई बारिश से सांसद आदर्श ग्राम तक आने-जाने में दुश्वारियां बढ़ी हैं। हालांकि सांसद निधि से दस लाख की लागत से सीसी रोड बनने से ग्रामीणों को थोड़ी राहत मिली है।
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सुरई वन रेंज में चारों ओर से घिरे बग्घा 54 गांव में यहां से आने-जाने के लिए दो मार्ग हैं। एक मार्ग सुरई होकर बग्घा जाने वाला 20 किमी मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र से होकर जाता है। दूसरा मार्ग उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के मझोला, न्यूरिया कालोनी से होकर बग्घा तक पहुंचता है, जो 42 किलोमीटर लंबा है। सुरई होकर जाने वाले मार्ग की तुलना में न्यूरिया कालोनी से होकर जाने वाला मार्ग अपेक्षाकृत ठीक है। सुरई होकर जाने वाले मार्ग इस पर बारिश और बड़े वाहनों के चलने से जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
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आरक्षित वन का 15 किमी मार्ग तय करने में चार पहिया वाहन से डेढ़ घंटे का समय लगता है। यही वजह है कि सरकारी अधिकारी इस गांव को कालापानी कहा करते हैं। मनरेगा के तहत सुरई गेस्ट हाउस से आगे तीन किलोमीटर फारेस्ट रोड पर 54 लाख की लागत से आरबीएम डाला गया है, लेकिन इसमें भी जगह-जगह गड्ढे होने से मार्ग खराब हो गया है। गड्ढों की वजह से कई बार 108 नहीं पहुंच पाती। सबसे अधिक परेशानी गर्भवतियों को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने अमर उजाला को बताया कि उनकी मुख्य समस्या जर्जर सड़क ही है। मार्ग की दयनीय हालत के कारण सरपुड़ा बग्घा के ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद का रुख करते हैं। वह अपनी फसल की बिक्री से लेकर रोजाना उपभोग की वस्तु उत्तर प्रदेश से ही लेते हैं। 

बरसात से पहले फारेस्ट रोड का जीर्णोद्घार संभव नहीं 
सांसद आदर्श ग्राम बग्घा 54 को जोड़ने तहसील मुख्यालय से जोड़ने वाली फारेस्ट रोड में गहरे गड्ढों को पाटने के लिए दो लाख का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया है। इस रोड का जीर्णोद्घार बरसात के बाद ही होना संभव है। फारेस्ट रोड को डामरीकरण का फिलहाल कोई प्रस्ताव यहां से नहीं भेजा गया है।
- आरके मौर्य, वन क्षेत्राधिकारी, सुरई वन रेंज 

पलायन करने वाले परिवारों ने खटीमा में बनाई बग्घा कालोनी

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शादी समारोह के लिए सरकारी और निजी भूमि से पेड़ न काटने वाले परिवार को पंचायत अपनी ओर से मुफ्त में दो या तीन गैस सिलेंडर देगी। - फोटो : Demo pic

राजस्व ग्राम सरपुड़ा के तोक बग्घा 54 को बसे पांच दशक बीत चुके हैं। इस गांव में सबसे पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के देवरिया क्षेत्र से कुछ परिवार आए थे। पौधरोपण के साथ ही इन परिवारों के जंगल में ही रखकर खेती कराने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत यहां 25 परिवारों को ढाई-ढाई हेक्टेअर जमीन देकर बसाया गया था। बाद में पिथौरागढ़ के थल, नाचनी, मुनस्यारी और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के लोग पलायन कर यहां बस गए। जमीन की उर्वरता देख के फागपुर, नौसर, बंडिया, चकरपुर आदि ग्राम सभाओं से भी लोग यहां आकर बसे।
        
सांसद कोश्यारी द्वारा इस गांव को गोद लेने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जागी थी कि इस गांव के दिन बहुरेंगे, लेकिन मार्ग सही न होने के कारण इस गांव से लोग अपनी जमीन बेचकर पलायन कर रहे हैं। बग्घा से पलायन करने वाले परिवारों ने तहसील के भूड़ महोलिया गांव में राजीव नगर में एक बग्घा कालोनी बना ली है। यहां रहने वाले ज्यादातर बग्घा 54 के लोग हैं, जो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई व अन्य समस्याओं के चलते यहां आकर बस गए हैं। इस बग्घा कालोनी में लगभग 25 परिवार बताए जाते हैं। इसके अलावा भी अन्य जगहों पर बग्घा के लोगों ने अपने घर बना लिए हैं।
     
सरपुड़ा बग्घा का तीन किलोमीटर का डामरीकरण फाइलों में       
सरपुड़ा से बग्घा तक का आरक्षित वन क्षेत्र से होकर जाने वाला तीन किलोमीटर मार्ग की भूमि हस्तांतरण का मामला डीएफओ के यहां से प्रस्ताव पास होकर चला गया है। विगत एक वर्ष से तीन किलोमीटर में डामरीकरण का कार्य प्रस्तावित है, लेकिन आराक्षित वन क्षेत्र की भूमि हस्तांतरित न होने की वजह से मार्ग का निर्माण अधर में लटका हुआ है। एसडीओ बाबू लाल ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की फाइल यहां से पास होकर जा चुकी है। फाइल कहां फसी हुई है, इसकी जानकारी नहीं है।       

फारेस्ट रोड पर आवागमन करने पर जुर्माने का प्रावधान      
सांसद आदर्श ग्राम आने जाने के लिए ग्रामीणों के द्वारा उपयोग किए जाने वाला फारेस्ट रोड केवल वन विभाग के अधिकारियों के उपयोग के लिए ही बनाया गया है। इस मार्ग आवागमन पर वन विभाग बाहरी व्यक्ति से 75 रुपए जुर्माना वसूल सकता है। फिर भी पूरा गांव इसी मार्ग से आवागमन करता है। वन विभाग ने भी कोई ऐसा प्रस्ताव शासन में नहीं भेजा है, जिसके तहत फारेस्ट रोड से आवागमन करने वालों से प्रतिबंध हटाया जा सके। वन क्षेत्राधिकारी सुरई वन रेंज आरके मौर्य ने कहा कि इस मार्ग से आवागमन मनमानी तरीके से किया जा रहा है, फिर भी वनों में रहने वाले वन गुज्जर व वन ग्राम में बसे लोगों को रोक पाना भी संभव नहीं है।       

खटीमा-पीलीभीत आवागमन को लगे हैं चार निजी वाहन      
सांसद आदर्श ग्राम में आवागमन के लिए कोई सरकारी वाहन की सुविधा नहीं है। चार निजी वाहन ही गांव से पीलीभीत व खटीमा आवागमन के लिए  साधन हैं। अधिक बारिश होने पर ये वाहन भी जगह-जगह खड़े हो जाते हैं। सरपुड़ा बग्घा 54 गांव के आंतरिक मार्गों की स्थिति भी सही नहीं है। ग्राम पंचायत में कुल 30 किमी खड़ंजा जरूर लग गया है, लेकिन बरसात के दिनों में उनकी हालत बेहद खराब हो जाती है। 

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