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गांधी आश्रम नई दिल्ली में प्रदर्शित किए जाएंगे उत्तराखंड के उत्पाद
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उत्तराखंड के संकुलों के उत्पादों को अब नई दिल्ली कनाट प्लेस स्थित गांधी आश्रम में प्रीमियम उत्पादों के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इससे राज्य के किसानाें की आर्थिकी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह जानकारी महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार के चांसलर पद्मश्री डॉ. महेश शर्मा ने दी।
डॉ. शर्मा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से मशरूम की औषधीय प्रजातियों को लेकर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि यदि राज्य के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करना है तो उन्हें मशरूम की औषधीय प्रजातियों का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कहा कि प्रदेश के युवा किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक विधि से मशरूम की औषधीय प्रजातियां का उत्पादन करना होगा। उन्होंने कहा कि गैनोडर्मा, कोर्डिसैप्स प्रजाति की मशरूम में उच्च गुणवत्ता के औषधीय गुण होते हैं, जो मानव शरीर के लिए फायदेमंद हैं। साथ ही इनकी खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। बाजार में यह मशरूम छह हजार से 30 हजार रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है।
कार्यशाला में रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी, देहरादून समेत कई जिलों के किसानों, युवाआें ने हिस्सा लिया। इस दौरान डॉ. डीपी उनियाल, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. पीयूष जोशी, अमित पोखरियाल, डॉ. आशुतोष मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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डॉ. शर्मा उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से मशरूम की औषधीय प्रजातियों को लेकर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि यदि राज्य के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करना है तो उन्हें मशरूम की औषधीय प्रजातियों का उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कहा कि प्रदेश के युवा किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक विधि से मशरूम की औषधीय प्रजातियां का उत्पादन करना होगा। उन्होंने कहा कि गैनोडर्मा, कोर्डिसैप्स प्रजाति की मशरूम में उच्च गुणवत्ता के औषधीय गुण होते हैं, जो मानव शरीर के लिए फायदेमंद हैं। साथ ही इनकी खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। बाजार में यह मशरूम छह हजार से 30 हजार रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है।
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कार्यशाला में रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी, देहरादून समेत कई जिलों के किसानों, युवाआें ने हिस्सा लिया। इस दौरान डॉ. डीपी उनियाल, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. पीयूष जोशी, अमित पोखरियाल, डॉ. आशुतोष मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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