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पहाड़ की पीड़ा: सड़क नहीं थी तो गर्भवती को डोली के सहारे नामिक से पहुंचाया कपकोट अस्पताल

Tue, 29 Jun 2021 08:57 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 29 Jun 2021 08:57 PM IST
सार

पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक गांव के लोग बुनियादी सुविधा, रास्ते, सड़क और संचार सेवा के न होने से परेशान हैं।

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Pithoragarh News: Pregnant Lady Admitted in Hospital with the help of doli
डोली के सहारे मरीज को लेजाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक के लिए सड़क न होने का खामियाजा लोग आए दिन भुगत रहे हैं। सड़क निर्माण का कार्य बहुत धीमा है। सड़क न होने के कारण नामिक के ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को आपदा में ध्वस्त पैदल रास्तों से डोली के सहारे 10 किमी पैदल चलकर बागेश्वर जिले के गोगिना गांव पहुंचाया। इसके बाद 35 किमी दूर वाहन से कपकोट अस्पताल ले जाया गया। यहां महिला का सुरक्षित प्रसव हो गया है। 

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जिले के अंतिम गांव नामिक गांव के लोग बुनियादी सुविधा, रास्ते, सड़क और संचार सेवा के न होने से परेशान हैं। गांव निवासी भोपाल सिंह टाकुली की 27 वर्षीय गर्भवती पत्नी गीता टाकुली पिछले चार दिनों से प्रसव पीड़ा से परेशान थी।
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मंगलवार को तेज प्रसव पीड़ा उठने के बाद ग्रामीणों ने महिला को डोली के सहारे आपदा में ध्वस्त और बदहाल रास्तों पर 10 किमी चलकर बागेश्वर जिले के गोगिना गांव पहुंचाया। यहां से वाहन से 35 किमी की यात्रा कर महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट ले गए। यहां चिकित्सकों की टीम ने महिला का सुरक्षित प्रसव करा दिया है। महिला ने स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया है। 
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जिले के अंतिम गांव नामिक के लोग लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह चिराल का कहना है कि होकरा से नामिक के लिए कांग्रेस सरकार के समय में सड़क का निर्माण कार्य तो शुरू हुआ, लेकिन सरकार बदलने के बाद सड़क निर्माण का कार्य बेहद धीमा है। उन्होंने सड़क निर्माण का कार्य तेज गति से पूरा करने की मांग की है।

मुनस्यारी लाते तो चलना होता 35 किमी पैदल 
 पिथौरागढ़ जिले के अंतिम गांव नामिक से अगर प्रसव पीड़िता को मुनस्यारी स्वास्थ्य केंद्र लाया जाता तो ग्रामीणों को 35 किमी पैदल चलना पड़ता। इसके बाद उन्हें होकरा से मुनस्यारी के लिए वाहन से यात्रा करनी पड़ती। मुनस्यारी की दूरी अधिक होने के ग्रामीण महिला को बागेश्वर जिले के कपकोट स्वास्थ्य केंद्र ले गए। 


जिले के अंतिम गांव नामिक में सड़क न होने के कारण लोगों को आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में मूलभूत सुविधा न होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। होकरा से जो नामिक गांव के लिए सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उसका निर्माण बेहद धीमा है। इसे तेज किया जाना चाहिए।
- पवन जैम्याल, ग्रामीण नामिक गांव। 

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