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उत्तराखंड में कोरोना: सावधान! 20 से 40 आयु वर्ग के लोगों का संक्रमण का खतरा अधिक
Fri, 14 Jan 2022 01:06 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jan 2022 01:06 PM IST
सार
एसडीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का मानना है कि 20 से लेकर 40 साल की उम्र के लोगों का एक्सपोजर कुछ ज्यादा ही रहता है।
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अनूप नौटियाल
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में 20 से लेकर 40 साल तक के लोग ज्यादा आ रहे हैं। ऐसा युवाओं के ज्यादा बाहर निकलने और कोरोना गाइडलाइन की अनदेखी की वजह से है।
एसडीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का मानना है कि 20 से लेकर 40 साल की उम्र के लोगों का एक्सपोजर कुछ ज्यादा ही रहता है। इस आयु वर्ग के लोगों पर पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ ही सामाजिक सरोकार भी कुछ ज्यादा ही रहते हैं।
इसकी वजह से इस आयु वर्ग वाले लोगों में कोरोना संक्रमण की दर अधिक देखने को मिल रही है। कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार 20 से लेकर 40 साल की उम्र के लोग नौकरियों की वजह या फिर घरेलू कामों की वजह से घर से बाहर ज्यादा निकलते हैं। ऐसे में उनके कोरोना संक्रमित होने का खतरा कुछ ज्यादा ही है।
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टीकाकरण अभियान के चलते बची हजारों की जिंदगी
कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार कोरोना टीकाकरण की वजह से लाखों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सका है। फिलहाल उत्तराखंड समेत पूरे देश में ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों की संख्या काफी कम है। जबकि डेल्टा वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है। इस बार डेल्टा वायरस से संक्रमित होने के बावजूद कई मरीजों में बीमारी का लक्षण तक नहीं दिखाई दे रहे हैं।
कोरोना संक्रमित होने पर बीमारी का लक्षण उन्हीं लोगों में दिखाई दे रहा है जिन्होंने कोरोना टीके की पहली व दूसरी डोज नहीं लगवायी है। जिन लोगों ने दोनों डोज लगवा ली हैं उन्हें संक्रमण तो हो रहा है, लेकिन लक्षण भी नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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एसडीसी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का मानना है कि 20 से लेकर 40 साल की उम्र के लोगों का एक्सपोजर कुछ ज्यादा ही रहता है। इस आयु वर्ग के लोगों पर पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ ही सामाजिक सरोकार भी कुछ ज्यादा ही रहते हैं।
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इसकी वजह से इस आयु वर्ग वाले लोगों में कोरोना संक्रमण की दर अधिक देखने को मिल रही है। कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार 20 से लेकर 40 साल की उम्र के लोग नौकरियों की वजह या फिर घरेलू कामों की वजह से घर से बाहर ज्यादा निकलते हैं। ऐसे में उनके कोरोना संक्रमित होने का खतरा कुछ ज्यादा ही है।
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टीकाकरण अभियान के चलते बची हजारों की जिंदगी
कोरोनेशन अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार कोरोना टीकाकरण की वजह से लाखों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सका है। फिलहाल उत्तराखंड समेत पूरे देश में ओमिक्रॉन संक्रमित मरीजों की संख्या काफी कम है। जबकि डेल्टा वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है। इस बार डेल्टा वायरस से संक्रमित होने के बावजूद कई मरीजों में बीमारी का लक्षण तक नहीं दिखाई दे रहे हैं।
कोरोना संक्रमित होने पर बीमारी का लक्षण उन्हीं लोगों में दिखाई दे रहा है जिन्होंने कोरोना टीके की पहली व दूसरी डोज नहीं लगवायी है। जिन लोगों ने दोनों डोज लगवा ली हैं उन्हें संक्रमण तो हो रहा है, लेकिन लक्षण भी नहीं दिखाई दे रहे हैं।