{"_id":"c5716a1dd0d79fc4f878bdb19024254e","slug":"office-office","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिसने ठीक पैसे लगाए उसे ही कुर्सी दे दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिसने ठीक पैसे लगाए उसे ही कुर्सी दे दी
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 20 Jul 2013 02:26 PM IST
विज्ञापन
कुछ माह पहले डीपीसी मिली तो साहब का ओहदा बढ़ गया। ‘मंत्री’ जी के खास थे, फिर क्या बचा था। मुख्यालय में कुछ दिन रहने के बाद ही पहली ही कुर्सी में राजधानी आ चिपके।
विज्ञापन
परेशानी जनता भुगत रही
नए साहब ने राजधानी में कुर्सी संभाली, इसके बाद अपना रोब भी तरे गालिब करना था। इसमें भी देरी नहीं हुई, अपने चिंटुओं को सीट बदलने का रेट तय किया। जिसने कुर्सी के ठीक पैसे लगाए उसे ही कुर्सी दे दी गई। जो चहेते नहीं, उन्हें पकड़ी दी अन्य सीटें। इससे अधिकारी और उनके चिंटू तो खुश हैं। लेकिन इन चिंटुओं में कुछ कर्मचारी, जिन्होंने बड़ी कुर्सी संभाल तो ली, अब वह ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे परेशानी जनता भुगत रही है।
विज्ञापन